"ड्रेस का फतवा"- भाग-1
... भाग-1 ... नेगी जी उन शिक्षकों में थे जो ड्रेस कोड से सहमत नहीं थे। जरा उनको सुलगा दो की ड्रेस होनी चाहिये। बस फिर वह, आपका हाथ पकड़ कर आपको पास की चाय की दुकान में ले जायेंगे। आपको अपने पैसे से चाय पिलायेंगे और साथ में समोसा भी खिलायेंगे। आज सुबह दूध लेट आया और मैं चाय नहीं पी पाया था। बिना चाय पिये ही स्कूल आ गया। तीसरी घंटी मेरी खाली होती है , और नेगी जी की भी। मेरा चाय पीने का मन हुआ। मैंने नेगीजी को नमस्कार किया। और कहा कि नेगी जी आपको क्या लगता है ड्रेस कोड लागू होगा या नहीं ? "नहीं बिल्कुल नहीं होना चाहिए" नेगी जी ने कहा । मेरा तीर बिल्कुल सही निशाने पर लगा। अगर हो भी हो जाता है तो क्या दिक्कत है ? मैंने कहा। बस नेगी जी ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, चलो चाय पीते हैं। ...... हम चाय की दुकान में पहुँचे। चाय की दुकान राणा जी की है। नेगी जी ने राणा जी को नमस्कार किया। और राणा जी से बोले- "राणा जी आप काफी मन से चाय बनाते हो। जब मोदी जी चाय बनाते रहे होंगे तो वह भी आपकी तरह मेहनत करते रहे होंगे। और आप उनसे अच्छी चाय बनाते हो, ऐसा मैं कह सकता हूँ। ऐसा कहते हुये उन्होंने...