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त- बदला 'कानून' ?

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1- ट्रांसफर एक्ट की धारा 23 (3) के अनुसार स्थानांतरण हेतु पात्र कार्मिकों की सूची 15 अप्रैल तक वेबसाइट में प्रदर्शित की जानी थी। क्या शिक्षा विभाग में यह सूची इस तिथि तक प्रदर्शित हुयी ? ..... 2- ट्रांसफर एक्ट की धारा 23 (3) के अनुसार उपलब्ध व संभावित रिक्तियों को भी 15 अप्रैल तक वेबसाइट में प्रदर्शित किया जाना था। क्या ऐसा हुआ ? ..... 3- ट्रांसफर एक्ट की धारा 23 (7) के अनुसार प्राप्त विकल्पों/ आवेदन पत्रों को वेबसाइट में 20 मई तक प्रदर्शित किया जाना था। क्या 20 मई तक ऐसा हुआ था ? 20 मई छोड़िये, क्या आज तक ऐसा हो पाया ? ...... 4- ट्रांसफर एक्ट की धारा 23 (9) के अनुसार,सक्षम अधिकारी द्वारा 10 जून तक स्थानांतरण आदेश जारी कर देने चाहिये थे ?क्या ऐसा हो पाया ? ...... 5- ट्रांसफर एक्ट की धारा 08 एवं 11 के अनुसार ट्रांसफर की अधिकतम सीमा उपलब्ध व संभावित रिक्तयों के बराबर किये जाने का प्रावधान है। क्या ऐसा किया गया ? ..... 6- ट्रांसफर एक्ट की धारा 22 (1) के अनुसार स्थानांतरण आदेश जारी किये जाने के एक सप्ताह के अंदर बिना प्रतिस्थानी की प्रतीक्षा किये बगैर कार्यभार ग्रहण किये जाने का प्रावधान ...

ट्रान्सफर नीति में बदलाव जरूरी

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       वर्तमान में लागू उत्तराखण्ड शिक्षक (विद्दालयी शिक्षा) प्रथम नियुक्ति , पदोन्नति एवं स्थानांतरण पर पदस्थापना नियमावली में संसोधन हेतु कुछ सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूँ।  A – तत्काल किए जा सकने वाले संसोधन 1-    उत्तराखण्ड शिक्षक (विद्दालयी शिक्षा) प्रथम नियुक्ति , पदोन्नति एवं स्थानांतरण पर पदस्थापना नियमावली 2013 , नियम 10( 2)- अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण-( झ)- के अनुसार यदि कोई Y श्रेणी के D में कार्यरत है तो वह (अधिक दुर्गम) E व F के लिए ,E श्रेणी से F और F वाला केवल F श्रेणी के लिए ही एक वर्ष बाद अनुरोध कर सकता था ।   परंतु 23 दिसंबर 2014 में चतुर्थ संसोधन के पश्चात इस एक वर्ष कि समय सीमा को पाँच वर्ष कर दिया गया है। सुझाव - ( i) - Y श्रेणी के विद्यालयों में ( D से E व F, E से F, तथा F से F ) अनुरोध के         आधार पर स्थानांतरण के लिए समय सीमा को पुनः एक वर्ष किया जाय।         ( इसके पीछे मेरा तर्क - क्योंकि आवेदक और अधिक दुर्गम ...

स्थानांतरण नियमावली उत्तराखंड की समीक्षा-भाग 1

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   सम्मानित शिक्षक साथियों ! उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य स्थापना के 13 साल बाद शिक्षकों के लिए अपनी बहुप्रतीक्षित स्थानांतरण नियमावली घोषित कए दी है। हिमालयी राज्यों की सबसे बड़ी बिडंबना यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों में , जहाँ सुविधाओं का आभाव होता है , कोई भी कर्मचारी रहना पसंद नहीं करता है। और पसंद करे भी कैसे ? 20 से 30 सालों से लोग लगातार परेशानियों से जूझते हुये नौकरी कर रहे हैं। जो सुगम में सुविधाजनक क्षेत्रों में कार्यरत हैं वह वहाँ से हटने को तैयार नहीं होते और मलाई काट रहे हैं। सबसे बड़ी बात सुगम में सुविधाजनक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी को वेतन भी ज्यादा मिलता है। ऐसे में दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी को अवसाद घेर लेता है और उसकी कार्य क्षमता में कमी आना स्वाभाविक है। प्राकृतिक न्याय का तकाजा भी यही है कि सभी को सुविधाजनक व असुविधाजनक क्षेत्रों में समान रूप से व बारी-बारी से कार्य करने का मौका मिले। पर ऐसा है नहीं शिक्षक संघटनों कि भूमिका भी इन मामलों में संधिग्द ही होती है। जो नियमावली बनी भी है वह दुर्गम व सुविधाजनक क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक...