ट्रान्सफर नीति में बदलाव जरूरी
वर्तमान में लागू उत्तराखण्ड शिक्षक
(विद्दालयी शिक्षा) प्रथम नियुक्ति, पदोन्नति एवं स्थानांतरण पर
पदस्थापना नियमावली में संसोधन हेतु कुछ सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूँ।
A – तत्काल
किए जा सकने वाले संसोधन
1-
उत्तराखण्ड शिक्षक (विद्दालयी शिक्षा)
प्रथम नियुक्ति, पदोन्नति एवं
स्थानांतरण पर पदस्थापना नियमावली 2013,नियम 10(2)-अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण-(झ)- के अनुसार यदि
कोई Y श्रेणी के D में कार्यरत है तो वह (अधिक दुर्गम) E
व F के लिए,E श्रेणी से F और F वाला केवल F श्रेणी के
लिए ही एक वर्ष बाद अनुरोध कर सकता था ।
परंतु 23 दिसंबर 2014 में चतुर्थ संसोधन के पश्चात इस
एक वर्ष कि समय सीमा को पाँच वर्ष कर दिया गया है।
सुझाव- (i)-Y श्रेणी के
विद्यालयों में (D से E व F, E से F, तथा F से F) अनुरोध के
आधार पर स्थानांतरण के लिए समय सीमा
को पुनः एक वर्ष किया जाय।
( इसके
पीछे मेरा तर्क - क्योंकि आवेदक और अधिक दुर्गम के लिए आवेदन कर रहा
है,यह
विभाग के लिए फायदेमंद है। इसलिए कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।)
(ii)-Y
श्रेणी में कार्यरत शिक्षकों को F से 03 वर्ष, E से 05 वर्ष तथा D से 08
वर्ष बाद
किसी भी श्रेणी के विद्यालय में अनुरोध के आधार
पर स्थानांतरण की स्वतन्त्रता दी
जाय।
( इसके पीछे मेरा तर्क
- क्योंकि आवेदक क्रमश: 06, 7.5 व 08
सेवा गुणांक प्राप्त कर
चुका है( अर्थात 06 से 08 साल
की सेवा के बराबर)। इसलिए अनुरोध के आधार पर
स्थानांतरण कोई परेशानी नहीं
होनी चाहिए।)
सुझाव- वर्तमान नियमावली के नियम 10- (1)(आ) में
पुन: यह प्रावधान किया जाना चाहिए कि यदि-
(i)
किसी अध्यापक को F श्रेणी के विद्यालय में 05
वर्ष हो गए हैं तो उसका अनिवार्य स्थानांतरण (उसकी सहमति से) E व D श्रेणी में किया जाना चाहिए।
(ii)
किसी अध्यापक को F श्रेणी के विद्यालय में 08
या अधिक वर्ष हो गए हैं तो उसका अनिवार्य स्थानांतरण (उसकी सहमति से) X श्रेणी के किसी भी विद्यालय में किया जाना चाहिए।( बशर्ते वह कभी X श्रेणी के किसी भी विद्यालय में कार्यरत न रहा हो)
( इसके पीछे मेरा तर्क – नियम
(i) नवनियुक्त अध्यापकों के लिए तो उपयुक्त है परन्तु
पुराने नियुक्त अध्यापकों के साथ
न्याय नहीं करेगा। बहुत सारे ऐसे साथी हैं जो 10 या
अधिक सालों से दुर्गम में कार्यरत हैं। इसलिए
नियम (ii) उनके लिए न्यायोचित होगा।)
3-
सुझाव- वर्तमान नियमावली के नियम 10 (1)(अ) में
पुन: यह प्रावधान किया जाना चाहिए कि यदि-
किसी अध्यापक को X श्रेणी के विद्यालय में 10 या
अधिक वर्ष हो गए हों और वह कभी Y श्रेणी के किसी भी विद्यालय
में कार्यरत न रहा हो, तो उसका अनिवार्य स्थानांतरण Y श्रेणी में किया जाना चाहिए। परन्तु यदि किसी अध्यापक ने Y श्रेणी में 05 वर्ष से कम सेवा की हो तो उस पर भी यही नियम लागू होना
चाहिए।
( इसके पीछे मेरा तर्क –
बहुत सारे ऐसे साथी हैं जो 10-20 या अधिक सालों से सुगम में कार्यरत
हैं। और समस्त सेवा काल में वह कभी दुर्गम
में कार्यरत नहीं रहे। उन्होने अपनी नयी नियुक्ति
सेटिंग से सुगम में करवा ली थी । इसलिए यह
न्यायोचित होगा।)
4-
उत्तराखण्ड शिक्षक (विद्दालयी शिक्षा)
प्रथम नियुक्ति, पदोन्नति एवं
स्थानांतरण पर पदस्थापना नियमावली 2013,नियम 10(2)(ख) को संसोधित कर दिया गया था, जिसमें यह
प्रावधान था कि राज्य सेवा में सेवारत पति/पत्नी Y श्रेणी
में एक स्थान या निकटवर्ती स्थान पर पदस्थापना के लिए अनुरोध कर सकते थे ।(2014
में संशोधन के पश्चात यह शिक्षा विभाग के कार्मिकों तक सीमित कर दिया गया था।) इस
नियम को पुन: बहाल किया जाय।
( इसके पीछे मेरा तर्क –
पति/पत्नी Y श्रेणी में एक स्थान या निकटवर्ती स्थान पर पदस्थापना के लिए अनुरोध करें, तो किसी को क्या आपत्ति होगी, चाहे वह शिक्षा विभाग
का हो या किसी और विभाग का।)
5-
उत्तराखण्ड शिक्षक (विद्दालयी शिक्षा) प्रथम
नियुक्ति, पदोन्नति एवं स्थानांतरण पर पदस्थापना नियमावली (संशोधित 2014) नियम 4(1) से रेलवे का मानक हटा दिया जाय।
6-
उत्तराखण्ड शिक्षक (विद्दालयी शिक्षा) प्रथम
नियुक्ति, पदोन्नति एवं स्थानांतरण पर पदस्थापना नियमावली (संशोधित 2014) नियम 9(1) में पदोन्नति में पदस्थापना में –
(i)
शिक्षिकाओं के लिए यथासंभव Y क्षेत्र
के D श्रेणी में पदस्थापित किए जाने की व्यवस्था है।
(ii)
Y
श्रेणी में न्यूनतम 15 सेवा गुणांक प्राप्त शिक्षकों को X श्रेणी में पद रिक्त होने पर पदस्थापित किए जाने की व्यवस्था है।
सुझाव- (i)
शिक्षिकाओं के मामले में विशेषकर महिला शाखा के मामले में उनको यथासंभव गृह मण्डल
में पदस्थापित किया जाय। यदि Y क्षेत्र में पदस्थापन की
बाध्यता हो और X क्षेत्र में पद रिक्त हों, तो पहले नियम 08 में दी गयी व्यवस्था के अनुसार पद रिक्त किए जाँय।
(ii) 15
या शासन द्वारा निर्धारित सेवा गुणांक प्राप्त शिक्षकों को पदोन्नति
पर तभी X क्षेत्र में पदस्थापित किया जाय, जब यह निश्चित हो कि संबन्धित विषय में उस से ज्यादा सेवा गुणांक वाला
शिक्षक Y क्षेत्र में कार्यरत न हो। यदि यह निश्चित हो जाय
कि संबन्धित विषय में उस से ज्यादा सेवा गुणांक वाला शिक्षक Y क्षेत्र में कार्यरत है, तो पहले ज्यादा सेवा
गुणांक वाले शिक्षकों को X क्षेत्र में पदस्थापित किया जाय, फिर शेष पदों पर पदस्थापना की जाय।
( इसके पीछे मेरा तर्क – जब
नियमावली में शिक्षिकाओं को यथासंभव D श्रेणी में पदस्थापना की व्यवस्था
है अर्थात उनके प्रति सॉफ्टकोर्नर अपनाने की बात
है, तो गृह मण्डल में पदस्थापना की जा सकती है।
क्योंकि कई बार वह इस बजह से पदोन्नति
छोड़ देती हैं। 15
या शासन द्वारा निर्धारित सेवा गुणांक
प्राप्त शिक्षकों के मामले की बात है तो
उससे पहले से कार्यरत और उससे ज्यादा गुणांक होने पर भी
जब शिक्षक सुगम में नहीं आ पाता तो वह
कुंठित हो जाता है। प्राकृतिक न्याय का तकाजा भी यही है
कि ज्यादा गुणांक वाले को पहले सुगम में
जगह मिले।)
7-
सुझाव-
संशोधित नियमावली 2014, नियम 08- प्रथम
नियुक्ति पर पदस्थापना में यह भी जोड़ा जाय
कि यदि कोई
अध्यापक पूर्व में भी शिक्षा विभाग में कार्यरत रहा हो और विभाग से अनापत्ति
प्राप्त कर
अपने पहले से उच्च पद पर सीधी भर्ती द्वारा
नियुक्त होता है, तो उस पर भी पदोन्नति पर पदस्थापना
के नियम लागू हों। विशेषकर महिला शाखा के
मामले में उनको यथासंभव गृह मण्डल में पदस्थापित
किया जाय। यदि Y क्षेत्र
में पदस्थापन की बाध्यता हो और X क्षेत्र में पद रिक्त हों, तो पहले नियम 08
में दी गयी व्यवस्था के अनुसार पद रिक्त किए
जाँय।
( इसके
पीछे मेरा तर्क – बहुत सारे शिक्षक साथी ऐसे होते हैं जो प्राइमरी
या एलटी में पहले से दुर्गम में
कार्यरत रहते हैं और सीधी भर्ती से प्रवक्ता
में चयनित हो जाते हैं, उनको सभी मामलों में पूर्व सेवा
का लाभ मिलता है, तो
पदस्थापना में क्यों नहीं मिलना चाहिए ? शिक्षिकाओं के मामले
में सामान्यत:
यदि उनके घर से बहुत दूर पोस्टिंग मिलती है
तो वह बच्चों व घर के लिए अपना कैरियर से समझौता
कर लेती हैं और कार्यभार ग्रहण नहीं करती
हैं। कई सारी शिक्षिकाओं ने प्रवक्ता की नयी नियुक्ति
इसलिए छोड़ दी, क्योंकि
उनको गृह मण्डल नहीं मिल पाया, जबकि पद खाली थे।)
8-
उत्तराखण्ड शिक्षक (विद्दालयी शिक्षा)
प्रथम नियुक्ति, पदोन्नति एवं
स्थानांतरण पर पदस्थापना नियमावली 2013,नियम 10(1)अ(ख) के अनुसार 55
वर्ष के शिक्षक व 52 वर्ष की शिक्षिका को अनिवार्य स्थानांतरण से छूट प्राप्त है।
सुझाव- यह सुझाव देते हुये थोड़ा कष्ट तो हो रहा
है,परन्तु मेरा मानना है कि यदि किसी के द्वारा एक वर्ष भी Y क्षेत्र के विद्यालय में सेवा नहीं की गयी तो उसे यह छूट अनुमन्य नहीं
होनी चाहिए।
9-
संशोधित नियमावली 2014, नियम 07 में वर्णित PP(उपस्थिति,रिजल्ट आदि) के अंकों को जोड़ने का जिक्र
है।
सुझाव- इसमें PP(उपस्थिति,रिजल्ट आदि) के अंकों को को जोड़ने के प्रावधान को हटा दिया जाय।
( इसके पीछे मेरा तर्क – क्योंकि
विभागीय आदेशों के अलावा शिक्षक हमेशा विद्यालय में ही उपस्थित रहता है। CL,CCL,
मातृत्व अवकाश, मेडिकल शासनादेशों के अनुरूप शिक्षकों को देय
हैं। इसलिए इन छुट्टियों को कुल उपस्थिती से घटाना तर्कसंगत नहीं है। दूसरी तरफ
रिज़ल्ट को भी इसलिए नहीं शामिल करना चाहिए,क्योंकि ऐसा किया
गया तो भविष्य में नकल करवाने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। लाख मेहनत करने के बाद भी
यदि अध्यापक रिज़ल्ट कम रहेगा तो उसके पास उपाय क्या होगा। अधिकारियों को यह समझना
होगा की विद्यार्थी का रिज़ल्ट केवल शिक्षक पर निर्भर नहीं होता । नहीं तो आने वाले
भविष्य में बिहार जैसे टौपर यदि उत्तराखंड में भी निकलने लगें ,तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
B– अगले वर्ष
तक किए जा सकने वाले संसोधन
10-
सुझाव- संशोधित नियमावली 2014, नियम 04 (पदस्थापना हेतु
विद्यालयों का चिह्निकरण) में यह प्रावधान किया जाना चाहिए कि यदि किसी विद्यालय
के कोटिकरन में शुद्धीकरण होता है और उसकी श्रेणी पहले से दुर्गम हो जाती है,तो उसके सभी अंक सबसे अधिक दुर्गम श्रेणी के माने जाँय।
( इसके पीछे मेरा तर्क – माना कोई
विद्यालय गलत कोटि करण के चलते C श्रेणी में बर्गीकृत हो गया हो और
बाद में सही करवाने पर D श्रेणी में आ गया हो, तो उसे शुरू से D श्रेणी का माना जाय और उसमें
कार्यरत शिक्षकों के सेवा गुणांक की D श्रेणी के हिसाब से
गणना की जाय। क्योंकि कोई विद्यालय D से C तो हो सकता है, पर C से D होना थोड़ा कठिन है।
11-
संशोधित नियमावली 2014, नियम 29 (1) 2 में वर्णित स्थानांतरण
की सीमा को किसी भी दशा में 03% से अधिक नहीं होनी चाहिए। नहीं तो स्थानांतरण
नियमावली के कोई मायने नहीं रह जाएंगे।
12-
वर्तमान में कोटिकरण हेतु जिस प्रकार अंकों का विभाजन
किया गया है,
उसमें कई विसंगतियाँ हैं उनको दूर किया जाना चाहिए ।
13-
वर्ष 2000 तक, 2000-2004 तक, 2004-2008 तक, 2008-2012 तक (संसोधन के पश्चात)
निर्धारित कोटिकरन के अंकों के आधार पर तात्कालिक समय में कौन सा विद्यालय किस
श्रेणी में था, उसी आधार पर सेवा गुणांकों को तय किया जाय।
जिससे पहले जो विद्यालय दुर्गम थे उनको दुर्गम की सेवा का लाभ मिल सके।
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