कोरोना वायरस..भाग-3
लॉक-डाउन में, मैं जब दूध लेने दुकान में पहुंचा तो दुकान के बाहर जमीन में लगभग एक-एक मीटर की दूरी पर, चूने से सफेद-सफेद गोले बनाये गये थे। पर दुकान पर खड़ा, कोई भी ग्राहक, उन गोलों की तरफ देख भी नहीं रहा था। जो भी लोग उन गोलों के अंदर खड़े थे, वह मजबूरी में खड़े थे। क्योंकि उनसे आगे, भीड़ के कारण, खड़े होने की जगह ही नहीं थी। लोग इतने पास-पास खड़े थे कि एक मीटर तो छोड़ो, उनके बीच एक सेंटीमीटर की दूरी भी न निकलती। जैसे हम हिंदुस्तानी हेलमेट दुर्घटना से बचने के लिये नहीं, पुलिस से बचने के लिये पहनते हैं। वैसे ही उनको पता था कि यह गोले दुकानदार ने उनके लिये नहीं, बल्कि पुलिस के लिये बनाये हैं। जिससे पुलिस वाले दुकान का चालान न कर पाएं। मैं नियमानुसार सबसे पीछे वाले व्यक्ति से एक मीटर की दूरी पर खड़ा हो गया। तब तक दो तीन लोग आये और मेरे आगे खड़े हो गये। मुझे हमेशा से भीड़ से डर लगता है इसलिये, मैं चुप-चाप उनसे एक मीटर और पीछे खिसक गया। पर तब तक दो तीन और लोग आये और मुझसे आगे खड़े हो गये। मेरी आदत ऐसे मामलों में प्रतिकार करने की कम है, इसलिये मैं चुप रहकर पीछे हटता चला जा रहा था। ...... ...