बच्चों की छुट्टी शिक्षकों की नहीं.....

" हेलो सर्किट ! फोन उठाने में इतनी देर क्यों कर दी ?"
--" नेचुरल कॉल भाई।"
"ओके ओके...जल्दी से यहाँ पहुंच।"
-- "कोई इमरजेंसी है क्या ?"
"नहीं,नहीं..आजकल हम मास्टरों की हालत पर रीसर्च कररेले हैं न ? उसी से रिलेटेड लफड़ा है।"
--" भाई ! कोई टेंसन नी लेने का, अपुन है न ? सब सुल्टा लेगा। मैं अभी पहुँचा भाई।"
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"अरे सर्किट तू इतनी जल्दी पहुंच गया ?"
--" जी भाई, अपुन तुमको टेंसन में नहीं देख सकता न।"
"ये अखबार देख ? ये पढ़।"
'मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार भारी बारिश व बर्फबारी होने की संभावना के कारण कक्षा 01 से 12 तक के बच्चों की छुट्टी।'
--"यह तो अच्छी बात है न भाई।"
"आगे पढ़ रे सर्किट।"
"पर शिक्षक,कर्मचारी विद्यालय में बने रहेंगे।"
--" तो इसमें ऐसा क्या भाई ?"
"चल ये बता कि स्कूल में शिक्षक का काम क्या होता है ?"
--"बच्चों को पढ़ाना और क्या।"
"करेक्ट, यहिच......क्या कहते हैं उसको ? मेरे खोपड़ी में घूम रेला है।"
--"विचार, भाई विचार।"
"करेक्ट। मेरे दिमाग में ये विचार चल रेला है कि अन्य शिक्षणेत्तर कर्मचारी तो कार्यालय में, यदि फाइलें पेंडिंग पड़ी होंगी उनको निबटायेंगे, पर जब सभी बच्चे लोगों की छुट्टी है, तो ये मास्टर लोग स्कूल में किसको पढ़ायेंगे ? क्लास की खाली कुर्सियों को ? या स्कूल की बिल्डिंग को ? 

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--"वाह ! भाई वाह। भाई का दिमाग तो अब सरपट दौडेला है। मेरे खोपड़ी में तो ये बात पहले घूसेली ही नहीं भाई।"
"याद कर सर्किट, जब अपुन लोग पढ़ते थे। तो जब अपुन लोगों की छुट्टी होती थी, तब शिक्षक लोगों की भी छुट्टी होती थी। भले ही स्कूल कार्यालय खुलने को मांगता था।"
--"हां भाई, जब भी कोई निन्धित आकाश होता था न..."
"ये सर्किट निन्धित आकाश नहीं,निबंधित अवकाश।"
--"वाह भाई, तुम जब ये शुद्ध हिंदी बोला न,ऐसा लगा कि जैसे टीवी में कोई संत उपदेश देरेला होगा।...
हां तो भाई, मैं कह रेला था कि जब कोई निन्धित आ...नहीं..नहीं..निबंधित अवकाश होने को मांगता था, चपरासी रजिस्टर लेकर क्लास में आता था, तो हमको रजिस्टर से ही आईडिया हो जाता था कि कल छुट्टी है। फिर मास्टर साब क्लास में सबको पढ़कर सुनाते थे-"सभी शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों व छात्र छात्राओं को सूचित किया जाता है कि कल दिनांक......को विद्यालय फ़लाणे अवकाश के कारण बंद रहेगा और कार्यालय खुला रहेगा।"
"हां, सर्किट तब शिक्षक लोग शिक्षक ही हुआ करते थे। अब वह बहूउद्देशीय कर्मचारी हो गये।"
--"हां भाई, वाकई तुम्हारी रिसर्च तो बड़ी जबरदस्त हो रेली है भाई। नयी सरकारों ने शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया। शिक्षक को अब एक कार्यालयी कर्मचारी बना दिया।"
"हां सर्किट जहाँ शिक्षक के कार्य और कार्यालयी कार्य में किसी को फर्क नजर न आये,वहाँ ऐसे क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलते रहेंगे।"

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