"मॉडल स्कूल और कैट्वॉक"


1- वैसे तो मैं सुबह जल्दी उठने का आदी नहीं हूँ, पर पिछले महीने जब से यह खबर आयी कि मॉडल स्कूल के लिए जिन्होंने एग्जाम दिया है, उनके लिए मैरिट 50 % कर दी है।
2- यह खबर सुनकर मेरा मन हिलोरें मारने लगा,कि अब तो जाना पक्का समझो। और मैंने जल्दी उठना शुरू कर दिया।
3- सुबह के अंधरे में दुर्गम के सन्नाटे में घूमने के लिए सड़क में आया,तो जंगली जानवरों के डर से क़दमों ने आगे बढ़ने से साफ़ इंकार कर दिया, जैसे विभाग ने अनिवार्य ट्रांसफर करने के लिए साफ मना कर दिया। विभाग को पता नहीं किन जंगली जानवरों का डर लगा?
4- पर मुझे, सच बता रहा हूँ बाघ का डर लगा,क्योंकि गांव वाले कई बार ताकीद कर चुके थे कि गुरूजी आपके कमरे की दायीं तरफ कई बार बाघ देखा गया है, इसलिए होशियार रहना।
5-अब होशियार तो कभी मैं अपनी कक्षा में नहीं रहा, जैसे तैसे अपनी पढाई पूरी की,तो यहाँ कैसे रहता ?
6- दूसरा मॉडल स्कूल के मेरे रिजल्ट ने भी साबित कर दिया कि (मेरे 60% अंक भी नहीं आ पाये) बेटे क्यों फालतू में होशियार बनने की कोशिश करता है ?
7- अब होशियार मैं हो नहीं सकता, और ऊपर से मास्टर, जो कर्मचारियों के सबसे कमजोर व डरपोक तबके से आता है,जिसके कंधे पर ग्राम प्रधान क्या ? छुटभैये नेता क्या ? प्रिंसिपल क्या ? अधिकारी क्या ? विधायक क्या ? मंत्री क्या ? पत्रकार क्या? और तो और जिनको वह पढाता है वह बच्चे क्या ? एक-एक धौल न जमायें तो फिर उनके जीवन का आनंद क्या ?
8- "नीम भी और करेला भी", तो डर लगना स्वाभाविक है। इसलिए ज्यादा दूर जाने की हिमायत नहीं कर पाया। अपने कमरे की बाईं तरफ की सड़क को सुरक्षित मान, क्योंकि इस तरफ बाघ को देखे जाने की खबर किसी ने मुझे नहीं दी थी,मैंने उसका उपयोग करने की सोची।
9- मैं पांच सौ मीटर के तीन-चार चक्कर लगाता, और उजाला होने से पहले अपने कमरे में लौट आता।
10- यह क्रम दो हफ्ते तक ठीक ठाक चलता रहा है, किसी को कोई खबर नहीं हो पाती थी। जब मैं उजाला होने से पहले कमरे में लौट आता था । मुझे वही सकून मिलता था , जो काले धन वाले को उसे, सफ़ेद कर, ठिकाने लगाने में आता होगा।
11- रविवार का दिन था। 10 बजे के करीब एक गांव वाले भाई साहब मेरे कमरे में टपक पड़े ।
 - "गुरूजी नमस्कार !"
- नमस्कार जी। आईये बैठिये । मैं अपने रात के जूठे बर्तनों को अपनी चारपाई के नीचे खिसकाते हुए बोला। दुर्गम का एक आनंद तो है, आपका किचन,लिविंग रूम, बेड रूम, अलाणा रूम, फलाणा रूम सब एक ही होता है।
"आज स्कूल नहीं गये ?"
- अरे भाई साहब, क्यों जुल्म करते हो ? अब संडे को भी हमसे स्कूल चलवाओगे क्या ?
" अरे ! आज संडे है क्या ? सॉरी ।
- कोई बात नहीं। कहिये कैसे आना हुआ ?
" आपके पैरों में कुछ चोट लगी है क्या ?"
- नहीं तो। पर आप अचानक ऐसा सवाल क्यों पूछ रहे हो ? आपको किसने बताया कि मेरे पैर में चोट लगी है ?
" अरे, गुरूजी आपसे क्या छुपाऊं ? जब से मोदी जी ने स्वच्छ भारत अभियान चलाया है, और खुले में शौच करने के लिए मना कहा, तब से मैं अँधेरे में ही निबटा लेता हूँ। किसी को खबर भी नहीं होती और हमारी इज्जत समाज में बनी रहती है। आपको तो मालूम ही है कि मैं मोदी जी का कितना बड़ा फैन हूँ । जबसे आप घूमने लगे मुझे भी थोड़ा सहारा मिलने लगा । आप तो मुझे नहीं देख पाते थे पर मैं झाड़ियों के पीछे से आपको देखता रहता था। पर मैं देखता था कि आप लहरा - लहरा के चलते थे। आज आप सुबह घूमने नहीं आये, मैंने आज डर-डर के ही जैसे तैसे निबटाया, तो सोचा कि आपकी चोट कहीं ज्यादा न बढ़ गयी हो, सो हाल-चाल पूछ लेता हूँ ।"
-- अरे, मुझे कोई चोट-चाट नहीं लगी है। मैं तो ठीक-ठाक हूँ।
"फिर गुरूजी आप का लहरा-लहरा कर चलना समझ नहीं आया ?"
-- भाई सहाब, आजकल मैं मॉडल स्कूल की तैयारी कर रहा हूँ ।
"पर मॉडल स्कूल का लहरा कर चलने से क्या ताल्लुक ? "
-- अरे, वो मैं 'कैट्वॉक' की तैयारी कर रहा हूँ, इसलिए आपको लगा होगा कि मैं लहराकर चल रहा हूँ।
" ये क्या कह रहे गुरूजी आप, कैट्वॉक और स्कूल में ?"
-- अरे, वो ऐसा वैसा साधारण स्कूल नहीं है, मॉडल स्कूल है । इसलिए मास्टर भी मॉडल होना चाहिए कि नहीं ? पढ़ाते तो हम यहाँ भी हैं। क्या पता फिल्मों में ही कोई रोल मिल जाय। कई कलाकार ऐसे हुये हैं , जो पहले मॉडल थे।
" क्यों मजाक करते हो गुरूजी ?"
-- मजाक नहीं कर रहा हूँ, अब आप ही बताओ कि हमारे स्कूल में टीचेर लोग एक जैसी ड्रेस में जाते हैं ?
" नहीं"
-- लेकिन मॉडल स्कूल में सभी टीचेर लोग एक ही ड्रेस में जाते हैं।
" अच्छा-अच्छा, तभी मैं सोचूं कि 'फलाणें ' गाँव के टीचर एक जैसी ड्रेस में क्यों जा रहे थे । ड्रेस परिवर्तन के अलावा और क्या-क्या बदलाव हुए हैं ,इन स्कूलों में ?
-- बहुत परिवर्तन हुये, इन स्कूलों में नियुक्ति के लिये टीचर्स की अलग से परीक्षा ली गयी। जो योग्य थे उनको वहां भेजा जायेगा।
" गुरूजी,एक बात पूछूँ ? नाराज तो नहीं होओगे ?"
-- अरे कोई नहीं, जो मन में आ रहा है पूछो, मास्टर नाराज होएंगे तो पढ़ाएंगे कैसे ? 
" इसका मतलब तो यह भी हुआ कि जो टीचर मॉडल स्कूल के अलावा अन्य स्कूलों में हैं वह योग्य नहीं हैं ?"
-- हाँ, यह भी एक मतलब निकाला जा सकता है ।
"तो सरकार ने अयोग्य टीचर भर्ती किये थे क्या ?"
-- देखो भाई साहब, यह तो आप सरकार से पूछें तो ही बेहतर है।
" गुरूजी, लगता है कि आप नाराज हो गये ?"
-- नहीं भाई साहब, आपसे नाराज होकर आखिर हम जायेंगे कहाँ ? कोई जरूरी नहीं मॉडल स्कूल में जा ही पायेंगे। बेचारे BRP/CRP तो कोर्ट से भी जीत गये थे, वह भी नियुक्ति के लिए रो रहें हैं, तो हमारा क्या भरोसा ? इस विभाग में ट्रांसफर भी 'योग्य' टीचर्स के ही हो पाते हैं। अब हमारे स्कूल में देखो सबको लगभग सबको 15 साल से ऊपर हो गये हैं। पर किसी का ट्रांसफर हुआ ?
" हाँ, सही कह रहे हो गुरूजी, भट्ट गुरूजी को देखो, उनकी पहली पोस्टिंग यहीं हुयी थी,और वह पिछले साल रिटायर भी यहीं से हो गये। बड़े भले आदमी थे।
-- भले थे,तभी तो ट्रांसफर नहीं हुआ । 
मुझे लगा कि आज भाई साहब पूरे मूड और फुर्सत में हैं। इस दुर्गम में छुट्टी का दिन काटना किसी महाभारत से कम नहीं है, मुझे भी अच्छा लग रहा था कि चलो कुछ तो समय कट रहा है। अन्य दिन होते तो मैं अंदर ही अंदर जरूर चिढ़ता।
" गुरूजी, एक बात और पूछूँ ?"
--एक नहीं जितनी पूछनी हैं पूछो। आज तो सन्डे है, कपडे धुलने थे, नहाना भी था, पर आज धारे पर पानी बहुत कम है। और गांव वालों की भीड़ भी काफी ज्यादा है, नंबर आना मुश्किल है।
" मैं पूछ रहा था कि - मैंने सुना है कि मॉडल स्कूलों में कुछ तो परीक्षा देकर जायेंगे, पर जो वहां पहले से हैं उन्होंने तो कोई परीक्षा नहीं दी, फिर वह कैसे योग्य हो गये ?
--यार, भाई साहब आप को इतनी जानकारी कहाँ से है ? इस सवाल का जबाब तो मेरे पास भी नहीं है।
" अरे, गुरूजी मेरे चाचा के लड़के का साला उत्तरकाशी में टीचर है। परसों यहाँ आया था, तब वह बता रहा था। वह कह रहा था कि ट्रांसफर तो इस विभाग में होना मुश्किल है, तो मैंने सोचा मॉडल स्कूल का फॉर्म भर देता हूँ। जहाँ मैं हूँ वह घर से 200 किमी है, मॉडल में हो गया तो 50 किमी तो कम होगा। आप भी इसिलिये तो नही जा रहे ?"
-- नहीं नहीं। ऐसा नहीं है। पर इस सवाल का जबाब देना मेरे लिए ठीक वैसा ही कठिन था , जैसे किसी ब्लैक मनी वाले से पूछो कि आपको सरकार का नोटबंदी का फैसला कैसा लगा ?
रुको, मैं चाय बनाता हूँ, और मैं बगल में कमरे के किचन के लिए निर्धारित हिस्से में रखे गैस में चाय का पानी चढाने लगा।

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