कोरोना वायरस..भाग-2


आजकल COVID-19 से बचाव का कार्य सरकार द्वारा युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। इस दौरान क्वारेंटीन (QUARANTINE) व आइसोलेशन ( ISOLATION ) शब्द प्रयोग में लाये जा रहे है। सोशल मीडिया में वायरल वीडियोज देखने से पता चल रहा है कि हम 'क्वारेंटीन' व 'आइसोलेशन' को सही से नहीं समझ पा रहे हैं। इस पोस्ट में हम क्वारेंटीन (QUARANTINE) को समझने का प्रयास करेंगे।
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प्रश्न - क्वारेंटीन (QUARANTINE) का क्या अर्थ होता है ?
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उत्तर- संक्रामक रोगों के मामले में क्वारेंटीन (QUARANTINE) को इस तरह समझा जा सकता है- यदि किसी व्यक्ति में किसी संक्रामक बीमारी के लक्षण भले ही न दिखाई दे रहे हों और वह पूरी तरह स्वस्थ दिख रहा हो, परंतु उसकी जाने-अनजाने किसी संक्रामक रोगी के संपर्क में आने की संभावना रही हो, उनको रोगजनक के *'रोगोद्भवन काल' (इन्क्यूबेशन पीरियड) तक अन्य स्वस्थ व्यक्तियों से अलग रखा जाता है।
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यह दो तरीकों से किया जाता है- किसी व्यक्ति को उसके घर पर ही (*रोगोद्भुवन काल तक) अलग रहने को कहा जा सकता है, इसको 'होम क्वारेंटीन' (HOME QUARANTINE) कहते हैं।
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या फिर किसी व्यक्ति को ऐसी जगह अलग रखा जाता है जो सरकार द्वारा क्वारेंटीन ( QUARANTINE) सेंटर के रूप में स्थापित हों। इसको सरकारी(संस्थागत) क्वारेंटीन (QUARANTINE) कह सकते हैं।
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प्रश्न- *रोगद्भुवन काल ( INCUBATION PERIOD) क्या होता है ?
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उत्तर- किसी व्यक्ति के शरीर में जब कोई बैक्टीरिया या वायरस प्रवेश करता है तो उस व्यक्ति में रोग के लक्षण तुरंत पैदा नहीं होते, बल्कि उसमें कुछ समय लगता है। रोग के लक्षण दिखने में जो समय लगता है, उसे 'रोगोद्भवन काल' या 'इन्क्यूबेशन पीरियड' कहते हैं। यह अलग-अलग बैक्टीरिया या वायरस के मामले में अलग-अलग होता है। अभी तक जो जानकारियाँ मिल पायी हैं उनके अनुसार 'नोवेल कोरोना वायरस' का रोगोद्भवन काल 4 से 14 दिन का माना जा रहा है।
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अभी अगर उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में देखें तो जो भी व्यक्ति विदेश से आये हों, वह तो हैं ही, परन्तु जो लोग भारत के अन्य प्रदेशों से उत्तराखंड वापस लौटे हैं, वह सभी 'नोवेल कोरोना वायरस' के सम्भावित वाहक माने जाएंगे। चाहे वह पूरी तरह स्वस्थ हों या स्वस्थ दिख रहे हों। ऐसे किसी व्यक्ति को फिलहाल कोई जांच कराने की आवश्यकता तो नहीं है। परन्तु ऐसे सभी लोगों को (14 दिन तक) 'होम क्वारेंटीन' (HOME QUARANTINE) में रहने की आवश्यकता है। होम क्वारेंटीन (HOME QUARANTINE) का मतलब है आप किसी से मिलें-जुलें नहीं, खुद के परिवार के सदस्यों से भी नहीं। खुद को अलग कमरे में रखें। न किसी के घर जायें न किसी को अपने घर आने दें।
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बचपन से गाँव में रहने के अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूँ कि बाहर से घर लौटे लोग शायद ही अपने घर के सदस्यों से अलग रहें या घर के सदस्य उनको अलग रहने दें। ऐसे में विदेश से या देश के विभिन्न प्रदेशों से घर लौटे लोगों का सम्पूर्ण परिवार COVID-19 के संभावित वाहक माने जाएंगे। इसलिये उनके परिवार के सभी सदस्यों को 'होम क्वारेंटीन' में रहना चाहिये उनको 14 दिन तक गाँव/शहर में किसी से मिलना जुलना नहीं चाहिये।
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14 दिन 'होम क्वारेंटीन' में रहने पर यदि आपको खांसी,बुखार के साथ-साथ सांस लेने में तकलीफ महसूस हो (इन लक्षणों का यह मतलब नहीं है कि आप को COVID-19 हो ही गया) तो तुरंत अपने आस-पास स्थित स्वास्थ्य केंद्र/ डॉक्टर के पास जाएं, वह आपको उपयुक्त सलाह देंगे या आप सीधे प्रशासन से भी मदद ले सकते हैं।
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अगर होम क्वारेंटीन (HOME QUARANTINE) के दौरान आप 14 दिन तक पूरी तरह स्वस्थ रहे, फिर आप 'नोवेल कोरोना वायरस' के संभावित वाहक नहीं माने जाएंगे। आप पूरी तरह (COVID-19 से) स्वस्थ माने जाओगे।

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#corona virus

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