कान उस तरफ से पकड़ो........."
आज एक सज्जन से बैंक की कतार में मुलाकात हुयी , जो बातचीत से किसी खास पार्टी के युवा तुर्क लग रहे थे। बातचीत से जल्दी से समझ आ गया कि वह "कान को इस तरफ से पकड़ रहे थे.........."
कहीं आप भी ऐसा ही तो नहीं कर रहे हो ? आओ इसका पता लगायें। मुलाकात का वार्तालाप सुनिये ----
"भाई साहब, देखो मोदी ने सबको पागल बना दिया है। कितने दिन और लोग लाइन में लगे रहेंगे ?
-- वास्तव में अभी यह लाइनें कुछ ज्यादा दिन चलने वाली हैं।
" वही तो, बिना तैयारी के नोट बंद कर दिये । किसी के घर में शादी है। किसी को लोन चुकाना है, किसी की तबीयत खराब है। आखिर लोग पैसा कहाँ से लायें ?"
-- आप बिलकुल सही कह रहे हैं। लोगों को परेशानी तो वास्तव में हो रही है। अब सरकार का निर्णय है, मानना तो पड़ेगा ही।
" देखना यह पूरे पांच साल रहे , तो यह गरीबों को पूरी तरह ख़त्म कर देंगे "
-- यह तर्क मुझे कुछ अजीब सा लगा, पर मैंने सहमति वाली इस्माइल पास कर दी। मेरी सहमति से उन्हें अपने तर्क पर गर्व जैसा कुछ महसूस हुआ ।
" भाई जी, मैं फलाणी पार्टी का युथ प्रकोष्ठ का सचिव हूँ। कभी कोई काम हो बताना ।"
-- काम है न ।
" क्या ?"
-- (अब आपको तो पता है, दुर्गम के अध्यापक को कोई वरदान मांगने को कहेगा, तो वह क्या मांगेगा ) मैंने कहा सर, मेरा ट्रांसफर करवाना है।
" ट्रांसफर , बात करूँगा । किस डिपार्टमेंट में हैं आप ?"
-- शिक्षा विभाग में। मेरा इतना कहना था कि वह मुझे बैकफुट पर खेलते दिखाई देने लगे।
" अरे, मास्टर साहब , किसी और विभाग की बात होती तो मैं करवा देता। पर आपके विभाग में थोड़ा मुश्किल है।"
-- क्यों हमारे विभाग में क्यों मुश्किल है ?
" ..........................."
-- उनका जबाब न मिलने पर । मैंने अगला बाउंसर फेंका । क्यों हमारे विभाग में सब ईमानदारी से और नियमों से होता है क्या ?
"........…................"
-- इसको उन्होंने बहुत ही डिफेंसिव तरीके से खेला। सवाल को जाने दिया । जैसे कुछ सुना ही न हो। लेकिन मैंने तो ओवर पूरा करना था। मैंने अगली बॉल फेंकी । चलो मेरा ट्रांसफर न सही एक काम तो कर सकते हो ?
" क्या ? "
-- ( वह अचानक मैच में वापस लौट आये ) भाई साहब , इस समय अनुरोध के आधार पर ट्रांसफर की काउंसलिंग हो गयी है। पर नियुक्ति पत्र जारी करने पर सरकार द्वारा रोक लगा दी गयी है। आप सरकार से इस पर लगी रोग हटवाने के लिये तो कह ही सकते हैं। आपको नहीं लगता कि यह "ट्रांसफर बंदी" उचित नहीं है ?
" देखिये भाई साहब, आप तो शिक्षक हैं । अगर इस समय बोर्ड परीक्षायें सर पर हैं। ट्रांसफर से बच्चों का नुकसान हो जायेगा।"
-- जब सरकार को यह पता था, तो कॉन्सेल्लिंग क्यों करवायी ?
"................................"
-- उन्होंने फिर, सवाल को जाने देना उचित समझा। उनको डर था कि कहीं "टंग स्लिप में कैच न करवा दे।" पर मैंने अगली गुगली फेंकी, चलो तो यही समझा दो कि ट्रांसफरों से बच्चों का नुकसान कैसा होगा ?
" कैसी बात करते हो मास्टर साहब , टीचर के चले जाने से बच्चे पढ़ेंगे कैसे ?"
-- टीचर पढ़ायेंगे।
"जब टीचर का ट्रांसफर हो जायेगा तो बच्चों को कौन पढ़ायेगा ?"
-- यही तो मैं आपको समझा रहा हूँ , टीचर पढ़ायेगा ।
" ओ कैसे ?"
-- जहाँ टीचर का ट्रांसफर होगा , वहां वह बकरियों को तो पढ़ायेगा नहीं, बच्चों को ही तो पढ़ायेगा ? जहाँ टीचरों का ट्रांसफर होगा , वहां जब पद खाली है ,तभी तो ट्रांसफर हो रहा है ? मुझे तो शिक्षकों का ट्रांसफर होने से बच्चों का फायदा नजर आता
है ?
" ऐं कैसे ?"
-- भाई साहब, कान इधर से पकड़ो या उधर से पकड़ो बात एक ही है। बोर्ड परिक्षाओं में 1-2 महीने रह गये । जहाँ वह टीचर हैं, वहां तो उन्होंने 08-10 महीने पढ़ा ही दिया है। जहाँ उनका ट्रांसफर होगा , वहां के बच्चों को भी विषयों के स्पेसिलाइज़्ड टीचर मिल जायेंगे । वह दो महीने भी उन बच्चों को पढ़ायेंगे तो उनको भी बोर्ड परीक्षाओं में लाभ होगा। अब आप ही बताओ कि बच्चों को लाभ होगा कि नुकसान ?
" सवाल को टालते हुये उन्होंने कहा, मुझे एक जरूरी कॉल करनी है, आप बीच में किसी को घुसने मत देना,मैं अभी आता हूँ।"
-- वह तब ही लौटे , जब मैं कैश काउंटर पर पहुँच गया। और वहाँ बात करना , खतरे से खाली नहीं था, क्योंकि कैशियर भी बहुत चिढा हुआ था । मैं अपने सवाल के जबाब का इंतजार करता रह गया।
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