स्थानांतरण नियमावली उत्तराखंड की समीक्षा-भाग 1
सम्मानित शिक्षक
साथियों !
उत्तराखंड
सरकार द्वारा राज्य स्थापना के 13 साल बाद शिक्षकों के लिए अपनी बहुप्रतीक्षित स्थानांतरण
नियमावली घोषित कए दी है। हिमालयी राज्यों की सबसे बड़ी बिडंबना यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों
में, जहाँ सुविधाओं
का आभाव होता है, कोई भी कर्मचारी रहना पसंद नहीं करता है। और
पसंद करे भी कैसे ? 20 से 30 सालों से लोग लगातार परेशानियों
से जूझते हुये नौकरी कर रहे हैं। जो सुगम में सुविधाजनक क्षेत्रों में कार्यरत हैं
वह वहाँ से हटने को तैयार नहीं होते और मलाई काट रहे हैं। सबसे बड़ी बात सुगम में सुविधाजनक
क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी को वेतन भी ज्यादा मिलता है। ऐसे में दूरस्थ क्षेत्रों
में कार्यरत कर्मचारी को अवसाद घेर लेता है और उसकी कार्य क्षमता में कमी आना स्वाभाविक
है।
प्राकृतिक न्याय का तकाजा भी यही है कि सभी को सुविधाजनक व असुविधाजनक क्षेत्रों
में समान रूप से व बारी-बारी से कार्य करने का मौका मिले। पर ऐसा है नहीं शिक्षक संघटनों
कि भूमिका भी इन मामलों में संधिग्द ही होती है। जो नियमावली बनी भी है वह दुर्गम व
सुविधाजनक क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों को चिढ़ाती सी प्रतीत होती रही है।
कोटिकरन
के मानक – (जिस आधार पर सुगम व दुर्गम का निर्धारण किया गया है )
1- कार्यस्थल से पैदल दूरी 10
2- सड़क मार्ग की सुविधायें 10
3- आवागमन को
सुविधायें 08
4- चिकित्सा सुविधायें 06
5- बैंक, पो0 ऑफिस की सुविधा 05
6- बच्चों के लिए शिक्षण सुविधायें 05
7- कमर्शियल सेंटर / बाजार सुविधायें 08
8- संचार एवं दूरभाष सुविधायें 06
9- सामान्य जन सुविधायें (बिजली,पानी,आवास)
06
10- कार्यस्थल
की समूद्र तल से ऊंचाई 06
विश्लेषण मोटे तौर पर – उपरोक्त लिस्ट को
ध्यान से देखिये। अंको का वितरण किस आधार पर किया गया है ? सभी आउट
ऑफ टेन क्यों नहीं हैं ? कुल स्कोर 70 हो रहा है, इसका क्या मायने समझा जाय ? क्रम संख्या 03 से 09
में वर्णित सुविधायें शहरी क्षेत्रों में ज्यादा हैं और उनके अंक भी कम हैं। जिस
से शहरी क्षेत्र के सभी स्कूल सुगम श्रेणी में न आ जायें। सड़क की सुविधा
महत्वपूर्ण है या आवागमन की ? मेरे हिसाब से दोनों की है और
मुझे दोनों में से एक चुनना हो तो आवागमन मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है, बिना आवागमन के साधनों के केवल सड़क चाटनी थोड़े ही है। फिर दोनों के अंक
भी बराबर होने चाहिए थे पर हैं नहीं ? पहाड़ों पर सड़क हैं पर आवागमन
के साधन नहीं। ऐसे में अधिकांश दुर्गम क्षेत्रों के स्कूल सुगम हो गए हैं।
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