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वोट पूजा की छुट्टी और गब्दू खरगोश का प्रायश्चित।

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उत्तरवन में आज वोट पूजा की छुट्टी घोषित हुई, तो गब्दू खरगोश ने सोचने लगा कि बैठे-बैठे क्या करूँ ? सोचा कि गंगा नहा लूँ और एलटी का अध्यापक बन, उसने जो पाप किया है उसको धो लूँ। वह देवप्रयाग वन की तरफ चल दिया। यूँ तो देवप्रयाग वन, गब्दू खरगोश के स्कूल से, करीब-करीब 30-35 किलोमीटर है। पर यह दूरी घटती-बढ़ती रहती है। यह दूरी सुबह छः बजे तो 30-35 किमी0 रहती है, परंतु साढ़े सात बजे के बाद यह 100 से 200 किमी0 हो जाती है। आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे संभव है ? दरअसल अगर कोई सुबह 7:30 तक तैयार हो गया तो गाड़ी मिल जाती है और करीब-करीब एक या डेढ़ घण्टे में देप्रयागवन पहुंचा जा सकता है। पर यदि कोई गब्दू खरगोश की तरह देर से उठने का आदी हो, तो फिर उसको गाड़ी या ट्रैकर बड़ी मुश्किल से मिल पाता है। कोई यदि आठ बजे ऋषिवन से दिल्ली वन के लिये तैयार हो और गब्दू खरगोश के स्कूल से देवप्रयाग वन के लिये तैयार हो, तो दिल्लीवन जाने वाला पहले पहुंच जायेगा। तो हुई न 100 से 200 किमी0 की दूरी ? सभी दुर्गम वनवासी इस बात को जानते और समझते हैं। ..... जैसे कुछ वनवासी 'ट्रांसफर एक्ट' के बजूद में होने के बावजूद 'द...