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"चाय पर चर्चा-प्रांतीय अधिवेशन ......भाग-14"

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..14.. "सर, मेरी अभी नयी-नयी शादी हुई है।" "बधाई हो।" मैंने कहा।  पर मैं थोड़ा कंफ्यूज हो गया कि महावीर जी, मुझ से क्या चाहते हैं। "धन्यवाद सर, पर यह बधाई ज्यादा दिन तक नहीं रहने वाली है।" "क्यों।" मैंने कहा। "अगर एक दो महीने यही हाल रहा, तो हमारा तलाक होने वाला है।" "देखो सर, मैं कोई मैरिज काउंसलर तो नहीं। पर मुझे लगता है कि आजकल लोग छोटी-छोटी बातों को लेकर अहम पाल लेते हैं। क्यों क्या कुछ झगड़ा हुआ क्या ?" मैंने कहा। "सर, छोटा- मोटा झगड़ा तो होता रहता था। पर अब बात बहुत आगे बढ़ गयी है ?"- महावीर बोले। "फिर तो मैं आपकी इस बारे में कोई मदद नहीं कर पाऊँगा। आपको किसी मैरिज काउंसलर से मिलना चाहिये। वही आपकी मदद कर पायेंगे।"- मैंने महावीर जी को समझाया। "नहीं सर, आपके पास मेरी परेशानी का हल जरूर होगा। मुझे ऐसा लगता है।" "पर मुझे ऐसा नहीं लगता।"- मैंने उनको फिर समझाने की कोशिश की। "नहीं सर, मेरी समस्या का हल किसी मैरिज काउंसलर के पास नहीं है। मेरा मन कहता है कि अगर आप मेरी कहानी पूरी सुन...

"चाय पर चर्चा-प्रांतीय अधिवेशन ......भाग-13"

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..13.. मैं अभी और अपने शिक्षक प्रतिनिधियों के बारे में सोचता रहता। पर तभी एक शख्स मेरी तरफ आते दिखाई दिये। पहले तो मुझे लगा कि वह किसी और से मिलने आ रहे हैं। क्योंकि वह मुझे परिचित नहीं लग रहे थे। पर वह मेरे सामने आकर रुक गये। "भाई साहब, नमस्कार ! मैं महावीर।" उन्होंने अपना परिचय देते हुये, अपना हाथ आगे बढ़ा दिया। "नमस्कार सर, क्षमा करें, मैंने आपको पहचाना नहीं ?" मैंने उनसे हाथ मिलाते हुये पूछा। "मैं पिथौरागढ से हूँ।" उन्होंने अपने परिचय को आगे बढ़ाया। "मैं आपकी चाय पर चर्चा पढ़ता रहता हूँ। आप काफी अच्छा लिखते हो।" "धन्यवाद।" कोई मेरे लिखे को पसंद करता है। थोड़ी देर सेलिब्रिटी जैसी फीलिंग हुयी। "पर आपने मुझे पहचाना कैसे ? क्या हम पहले कहीं मिले हैं ?" "फ़ेसबुक में आपका फ़ोटो देखा था। इसलिये पहचान लिया। वैसे मैं सुबह से आपको ढूंढ रहा था। मुझे पता था कि आप यहाँ जरूर मिलेंगे।" महावीर जी ने कहा। "आप मुझे ढूंढ रहे थे ? क्यों ?" "आप को मेरे साथ भी एक चाय पीनी पड़ेगी।" "क्यों?" "हमारी भी...