संदेश

फ़रवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हैप्पी मुकर संक्रांति.

चित्र
"ये सर्किट ! सुन।" -- "जी, भाई !" "वो सामने देख।" -- "भाई, आज लगता है आपने ज्यादा चढ़ा ली है। वो लाल सूट वाली भाभी नहीं है, कोई और है।" "नहीं रे, कभी लाल-पीली सूट वालियों के अलावा भी किसी और को देख लिया कर।" -- "सॉरी भाई।" "वो देख उसके बगल में खड़े आदमियों को।" -- "क्यों भाई, किसी को उठाना है क्या ?" "नहीं रे, उनकी बात ध्यान से सुन।" "हैप्पी मुकर संक्रांति...हैप्पी मुकर संक्रांति....." -- "क्या भाई, इसमें सुनने जैसा क्या है ?" ''ये सर्किट, ये लोग गलत बोल रेले हैं। 'हैप्पी मुकर संक्रांति नहीं' 'हैप्पी मकर संक्रांति' होता है।" -- "नहीं भाई, ये लोग सही बोल रेले हैं।" "ये सर्किट कान इधर ला रे, यार मेरा जनरल नॉलेज आजकल कुछ कमती चल रेला है। मैंने 'हैप्पी मकर संक्रांति' तो सुना है, पर ये 'हैप्पी मुकर संक्रांति' कौन सा त्योहार है ?" -- "बताता हूँ भाई। ये दुर्गम के शिक्षक हैं। ये मकर संक्रांति तो इस साल म...