शिक्षिकों को ग्रामीणों ने रास्ते मे रोका
सुना है कि ‘’ देहारादून से चकराता कालसी जाने वाले शिक्षिकों को ग्रामीणों ने रास्ते मे रोका ‘’ 1- ठीक है जनता को जागरूक होना ही चाहिए । 2- वास्तव में इतनी दूर प्रतिदिन आना-जाना और फिर पढ़ाना मुश्किल तो है ही। 3- इसमें कोई संदेह नहीं कि वह शिक्षक अपना 100% बच्चों को नहीं दे पाते हैं। 4- यह भी सही है कि शिक्षक को अपने विद्यालय के आस-पास कमरे लेकर रहना चाहिए। व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना भी यही है। पर साथियों और जागरूक जनता थोड़ा रुकें और सोचें कि – 1- आखिर नौकरी इंसान करता क्यों है ? अपने लिए,बच्चों व परिवार के लिये। 2- 20-20 साल से लोग अपने घर,परिवार व बच्चों से दूर दुर्गम में नौकरी कर रहे हैं। इस उम्मीद में कि आज ट्रान्सफर होगा, कल ट्रान्सफर होगा। 3- वर्ष बीतते रहे और वह वहीं जमे हैं। फिर शिक्षकों ने एक हल निकाला कि क्यों न नजदीकी शहर से अप-डाउन किया जाय। 4- कुछ लोग 20-20 ,25-25 साल से सुगम में डटे हैं। उनको देखकर भी तो मन जलता होगा। 5- अब रोज-रोज आने-जाने में जान को जोखिम में डालना हुआ। जान को जोखिम में कोई ऐसे ही नहीं डालता ? 6- जान भले ही रह भी गयी, पर स्वास्थ्य की समस्या तो 100% हो...