उत्तरवन का शिक्षक दिवस..भाग-3
........ मंत्री जी कार्यक्रम स्थल में पहुंच गये थे। स्कूल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। बीच-बीच में सभी वक्ताओं ने अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संचालन मंटी खरगोश कर रहे थे। उन्होंने मंत्री जी को अपने विचार रखने के लिये आमंत्रित किया। मंत्री जी ने अपने भाषण की शुरुआत कबीर दास जी के इस दोहे से की- "गुरु गोविन्द दोऊ खड़े काको लागूं पायं। बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताय।।" कबीर दास जी के इस दोहे को लगभग सभी वक्ताओं ने अपने वक्तव्य का हिस्सा बनाया। यह एक मात्र ऐसा दोहा है जिसको एक दिन में सबसे ज्यादा बार बोला जाता होगा। इस मामले में इस दोहे को 'जंगल बुक ऑफ वर्ड रेकॉर्ड्स' में शामिल किया जा सकता है। मंत्री जी के आगे के भाषण का सार था कि गुरु का स्थान भगवान से भी बड़ा है। मैं शिक्षकों की समस्याओं के प्रति गंभीर हूँ। उनके सम्मान के लिये मुझसे जो भी होगा मैं करूँगा। अपने भाषण का अंत उन्होंने इस दोहे से किया- "सब धरती काजग करू, लेखनी सब वनराज। सात समुद्र की मसि करूँ,गुरु गुण लिखा न जाए। मंत्री जी ने बहुत ही कोमल और मीठे स्वर में अपना भाषण समाप्त किय...