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अप्रैल, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

'नोवेल करना वायरस'..भाग -4

अगर लॉक-डाउन आगे बढ़ता है... .......... लॉक-डाउन अगर आगे बढ़ता है। तो सबसे पहले राहत शिविरों में रह रहे लोगों को उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर किये जाने की आवश्यकता है। राहत शिविरों में वह लोग रखे गये हैं, जो लॉक-डाउन के बाद अपने घरों को जाने की कोशिश कर रहे थे। समाचार पत्रों व मीडिया में वायरल खबरों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह लोग इन राहत शिविरों में 22 से 31 मार्च के बीच की अवधि से रह रहे हैं। ..... यह अधिकांश राहत शिविर स्कूलों में स्थापित हैं। जिनमें औसतन 50 लोग तो रह ही रहे होंगे। स्कूलों में शौचालयों की संख्या सीमित होती है। अगर कोई नहाना चाहे तो नहाने के लिये उचित व्यवस्था नहीं रहती। नहाने की उचित सुविधा केवल उन विद्यालयों में होती है जो रेजिडेंशियल होते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन स्कूलों को राहत शिविरों में बदला गया है वह सभी नॉन-रेजिडेंशियल हैं। सीमित शौचालय होने के कारण इन लोगों को होने वाली कठिनाई को समझा जा सकता है। गर्मियां शुरू हो गयी हैं, स्नानागार नहीं भी हैं, तो यह बाहर खुले में नहा सकते हैं। ऐसा भी सवाल शायद किसी के मन में आ रहा हो। पर...

कोरोना वायरस..भाग-3

लॉक-डाउन में, मैं जब दूध लेने दुकान में पहुंचा तो दुकान के बाहर जमीन में लगभग एक-एक मीटर की दूरी पर, चूने से सफेद-सफेद गोले बनाये गये थे। पर दुकान पर खड़ा, कोई भी ग्राहक, उन गोलों की तरफ देख भी नहीं रहा था। जो भी लोग उन गोलों के अंदर खड़े थे, वह मजबूरी में खड़े थे। क्योंकि उनसे आगे, भीड़ के कारण, खड़े होने की जगह ही नहीं थी। लोग इतने पास-पास खड़े थे कि एक मीटर तो छोड़ो, उनके बीच एक सेंटीमीटर की दूरी भी न निकलती। जैसे हम हिंदुस्तानी हेलमेट दुर्घटना से बचने के लिये नहीं, पुलिस से बचने के लिये पहनते हैं। वैसे ही उनको पता था कि यह गोले दुकानदार ने उनके लिये नहीं, बल्कि पुलिस के लिये बनाये हैं। जिससे पुलिस वाले दुकान का चालान न कर पाएं। मैं नियमानुसार सबसे पीछे वाले व्यक्ति से एक मीटर की दूरी पर खड़ा हो गया। तब तक दो तीन लोग आये और मेरे आगे खड़े हो गये। मुझे हमेशा से भीड़ से डर लगता है इसलिये, मैं चुप-चाप उनसे एक मीटर और पीछे खिसक गया। पर तब तक दो तीन और लोग आये और मुझसे आगे खड़े हो गये। मेरी आदत ऐसे मामलों में प्रतिकार करने की कम है, इसलिये मैं चुप रहकर पीछे हटता चला जा रहा था। ...... ...

कोरोना वायरस..भाग-2

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आजकल  COVID -19 से बचाव का कार्य सरकार द्वारा युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। इस दौरान क्वारेंटीन (QUARANTINE) व आइसोलेशन ( ISOLATION ) शब्द प्रयोग में लाये जा रहे है। सोशल मीडिया में वायरल वीडियोज देखने से पता चल रहा है कि हम 'क्वारेंटीन' व 'आइसोलेशन' को सही से नहीं समझ पा रहे हैं। इस पोस्ट में हम क्वारेंटीन (QUARANTINE) को समझने का प्रयास करेंगे। .... प्रश्न - क्वारेंटीन (QUARANTINE) का क्या अर्थ होता है ? ..... उत्तर- संक्रामक रोगों के मामले में क्वारेंटीन (QUARANTINE) को इस तरह समझा जा सकता है- यदि किसी व्यक्ति में किसी संक्रामक बीमारी के लक्षण भले ही न दिखाई दे रहे हों और वह पूरी तरह स्वस्थ दिख रहा हो, परंतु उसकी जाने-अनजाने किसी संक्रामक रोगी के संपर्क में आने की संभावना रही हो, उनको रोगजनक के *'रोगोद्भवन काल' (इन्क्यूबेशन पीरियड) तक अन्य स्वस्थ व्यक्तियों से अलग रखा जाता है। .... यह दो तरीकों से किया जाता है- किसी व्यक्ति को उसके घर पर ही (*रोगोद्भुवन काल तक) अलग रहने को कहा जा सकता है, इसको 'होम क्वारेंटीन' (HOME QUARANTINE) कहते हैं। ..... या फि...