*"मेरी पीड़ा"* 

1- फोटो को ध्यान से देखें। पहले पूरी खबर पढ़ लें। फिर अंडरलाइन पर ज्यादा गौर करें।
2- अब खबर के उद्देश्य पर गौर करें ?
3- पातरकार मित्र क्या सन्देश दे रहें हैं ?
4- प्रथम दृष्टया यह लगता है कि यह छुट्टियों में अपने कार्य के प्रति समर्पित अथिति शिक्षकों को समाज के सामने लाना चाहते हैं।
5- मीडिया का काम ही यह है, उसे ऐसा करना चाहिए।


6- पर खबर को ध्यान से पढ़ने पर पता चलता है कि यह "स्थायी शिक्षक" विरोधी मानसिकता के कारण लिखी खबर है।
7- इस बात को लिखने क्या मतलब हुआ कि अथिति शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं ,"जबकि स्थाई शिक्षक छुट्टी जा रखे हैं।" इससे ऐसा प्रतीत होता है कि स्थाई शिक्षकों ने छुट्टी जाकर गुनाह कर दिया। और उन्हें छात्रों के हित की कोई चिंता नहीं है।
8- आखिर मीडिया वाले समाज को क्या सन्देश देना चाहते हैं ? कि स्थाई शिक्षक बच्चों के प्रति समर्पित नहीं हैं ? तभी तो कुकुरमुत्तों की तरह प्राइवेट स्कूल खुल रहे हैं।
9- और उन स्कूलों में हजारों अप्रशिक्षित शिक्षक कार्य कर रहे हैं। या यूँ कहें कि अपना शोषण करवा रहे हैं। 
10- क्या यह संभव है कि एक अप्रशिक्षित व्यक्ति, प्रशिक्षित से बेहतर कार्य कर सकता है ? अगर हाँ, तो फिर सारे प्रशिक्षण संस्थानों को बंद कर देना चाहिये। उन पर करोड़ों रूपये बर्बाद करके क्या फायदा ?
11- एक प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित व्यक्ति में उतना ही फर्क है, जितना जर्नलिज़्म की डिग्री लेकर पत्रकार बनना और अख़बार बेचकर खुद को पातरकार कहलाना।
12- जो वास्तव में पत्रकार होते हैं, वह न्यूट्रल होकर ख़बरें लिखते हैं।
13- अब ऐसे पातरकार बंधुओं से मेरा कहना है, कार्य करने या न करने का स्थायी व अस्थायी होने से कोई सम्बन्ध नहीं है। यह तो इंसान की फितरत है। जो कर्तव्यनिष्ठ होते हैं, वह अपना कार्य आत्मानुशासन से करते हैं। यह सोच कर नहीं कि स्थाई है या अस्थाई ?
14- अगर अस्थाई होना अच्छा कार्य करने की शर्त है। तो क्या जब यह अथिति शिक्षक अपने को स्थाई करने के लिए आंदोलन कर रहे थे, तब क्यों नहीं इन पत्रकार बंधु ने खबर लिखी, कि यह लोग गलत कर रहे हैं ?
15- और अब जब यह लोग अपने स्थाईकरण के लिये भविष्य में आंदोलन करेंगे तो क्या यह पातरकार बंधु इनके विरोध में रिपोर्टिंग करेंगे ?
16- मेरे पातरकार मित्रों पहले तो यह जान लें कि छुट्टियां बच्चों की होती हैं, शिक्षकों की नहीं । कभी ऐसा सुना कि शिक्षकों की छुट्टी पड़ गयी और बच्चे स्कूल जाते रहें। स्कूलों में छुट्टी का मतलब बच्चों की छुट्टी से ही होता है। अपना सामान्य ज्ञान सही करें।
17- जब गर्मियां ज्यादा होती हैं या सर्दियाँ ज्यादा होती हैं, तो बच्चों के स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुये अवकाश का प्रावधान किया गया और किया जाता है। अध्यापकों को तो मजबूरी में छुट्टी जाना पड़ता है। उनके लिये तो यह थोपी गयी छुट्टियां हैं।
18- *अध्यापकों ने इन जबर्दस्ती थोपी गयी छुट्टियों को समाप्त करने के लिये अभी कुछ दिनों पहले प्रदेशव्यापी आंदोलन किया था, पर सरकार ने माना ही नहीं।*
19- आप अपना अख़बार तो पढ़ते ही होंगे, जब सर्दियाँ ज्यादा होती हैं या दूसरे शब्दों में "कड़ाके की सर्दी" होती है तो जिलाधिकारी द्वारा ऐसे में अतिरिक्त छुट्टी की घोषणा की जाती है। इस खबर को भी आप छापते हैं।
20- *अगर ऐसे में कोई स्कूल खुला रहता है तो आप लिखते हैं,कि देखो फलाने स्कूल वाले प्रशासन का आदेश नहीं मान रहे हैं, और बच्चे कड़ाके की ठण्ड में स्कूल जाने को मजबूर हैं।*
21- अपनी रिपोर्ट में आप लिख रहे हो कि " गेस्ट टीचर इस कड़ाके की ठण्ड में बोर्ड परीक्षा की तैयारी करा रहे हैं।" अगर आप सही हैं और ठण्ड कड़ाके की है, तो गेस्ट टीचरों पर कार्यवाही होनी चाहिये। क्योंकि वह विभाग का व प्रशासन आदेश नहीं मान रहे हैं।
22- रही बात स्थाई शिक्षकों की छुट्टी जाने की, वह जोगी नहीं हैं, उनका भी अपना परिवार और बच्चे हैं। अपने घर और बच्चों से 200 से 500 किमी0 दूर रहकर नौकरी कर रहे हैं। बच्चे कब बड़े हुये और कैसे बड़े हुये, उनके साथ समय बिताने का यही एक मौका होता है।
23- नियुक्ति में चमोली वाले को उत्तरकाशी व उत्तरकाशी वाले को चमोली भेजा जाता है। और शिक्षकों के ट्रांसफर के हालात यह हैं , रसूखदार नहीं हो, तो जिंदगी भर लटके रहो ,एक ही जगह पर। आपको पता है गांवों में दुर्गम में शिक्षक ही तो एक मात्र कर्मचारी हैं, जो वहां दिखाई देते हैं। 
24- बहुत सारे शिक्षक किन कठिन हालातों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसका आपको अंदाजा नहीं है। और एप्रिसिएशन के नाम पर उनको विभाग, मीडिया और समाज से क्या मिलता है- हिकारत। 
25- ऐसे माहौल में जहाँ विभाग,मीडिया और समाज ने जिसको निक्कमा घोषित करने में अपनी पूरी ऊर्जा लगा दी हो, वह अभी भी मुस्तैदी से डटा है । 
26- स्थाई शिक्षक विरोधी मानसिकता रखने वाले पातरकार मित्रों, शिक्षकों को सामाजिकता व छात्रप्रेम का पाठ न पढ़ायें।
कभी आपने सोचा कि आपका अख़बार देहरादून,ऋषिकेश में 04 रूपये का है और जहाँ हम लोग कार्य करते हैं,यहाँ 05 रूपये का बिकता है। और मजे की बात हम तो एक दिन का बासी अख़बार भी 05 रूपये में खरीदते हैं
27- मेरे मित्रों क्या कभी आपने सोचा कि बराबर पेज का अख़बार दून में 04 का और उत्तरकाशी व चमोली में 05 क्या क्यों ? यह कैसा समाजवाद है ?
28- अगर इस सवाल का जबाब कभी ढूंढ पाये, तो आपको पता चल जायेगा की स्थायी शिक्षक छुट्टी क्यों गये ?
29- अंत में उन सभी अस्थाई व स्थाई शिक्षकों को साधुवाद जो छुट्टियों में बच्चों के वेलफेयर में लगे हैं।
30- अंत में यह डायलॉग- "मुझे दिक्कत इसमें नहीं कि पाकिस्तान जिंदाबाद, दिक्कत इसमें है कि हिंदुस्तान मुर्दाबाद क्यों ?



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