हड़ताल के बाद
सम्मानित साथयों,
1- सभी अब हड़ताल के बाद अपने- अपने विद्यालयों में पहुँच गए होंगे। राजकीय शिक्षक संघ को नयी उचाईयों पर पहुचाने के लिए आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद।
2- हड़ताल वापस होनी चाहिए थी या नहीं इस पर सबकी अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं हैं।
3- ठीक इसी प्रकार आंदोलन की सफलता व असफलता को भी लोग अपने- अपने नजरिये से परिभाषित कर रहे हैं।
4- कई लोग निराश हैं कि यह नहीं मिला वह नहीं मिला आदि आदि।
5- मेरा आप सब संघ से जुड़े सदस्यों से अनुरोध है कि निराश होना उचित नहीं है।
6- पहली बार राजकीय शिक्षक संघ द्वारा उत्तराखंड बनने के बाद इतना विराट आंदोलन किया गया।
7-यह पहली लड़ाई है, आखरी नहीं।
8- ये होना चाहिए था वो होना चाहिए था, आपके सुझावों का स्वागत है, संघ से जुड़े रहिये मीटिंग में आईये। अपने सुझावों को लिखित रूप में पत्र के माध्यम से अपने संघठन की किसी भी शाखा को भेजिए।
9- नेतृत्व के निर्णय का सम्मान करिये। हर नेतृत्व की अपनी सीमाएँ होती हैं। इन सब ने अपनी क्षमता के अनुसार कार्य किया। हो सकता है किसी के लिए कम हो।
10- आप में कई की क्षमताएं ज्यादा हो सकती हैं, आप अपने नेतृत्व से संघ को और आगे ले जाएँ। आपका स्वागत है।
11- कुछ भी आलोचना या समालोचना करने से पहले इस बात को जरूर ध्यान में रखें कि ब्लॉक् के धरने में क्या हम बिना किसी दिन का ब्रेक लिए सम्मिलित हुए हैं या नहीं ?
12- आंदोलन के दौरान जब निदेशालय में जिले वार ड्यूटी लगायी थी, हम कितने बजे तक आमरण अनशनकारियों के साथ रहे ? या कितने लोग रात को उनके साथ रुके ?
13- आपकी नजर में कोर्ट के निर्णय के बाद आंदोलन को किस तरीके से आगे बढ़ाना चाहिए था,अपने सुझाव संघ को जरूर दें, हो सकता है वह भविष्य में काम आएँ।
14- साथियों , पहली बार नेतृत्व द्वारा इतना बड़ा आंदोलन किया गया, आंदोलन को चलाने के लिए जिस होमवर्क की जरूरत होती है, उसकी कमी बहुत दिखी। पर ऐसा होना स्वाभाविक है, सीखना अनुभव के बाद ही संभव होता है।
15- कितनी मांगे मानी जाएँगी यह तो कुछ दिनों बाद पता चलेगा। पर कोई मुझे पूछे कि इस आंदोलन से क्या मिला ? तो मेरा जबाब है कि सब कुछ मिल गया। क्योंकि राजकीय शिक्षक संघ को उसके सदस्य मिल गए। जगह जगह धरनों में उपस्थित भीड़ व देहरादून की रैली में उमड़ी भीड़ ,मुझे आश्वस्त करती है कि आगे जो भी लड़ायी सरकारों से होगी,जीत हमारी होगी।
16- जिन साथियों द्वारा आंदोलन में प्रतिभाग नहीं किया गया। उनके विचारों का भी मैं स्वागत करता हूँ।वह शायद बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं चाहते थे। उनके आत्मसम्मान ने उन्हें आंदोलन जैसे गलत काम से रोका।
17- मुझे उम्मीद है कि हम जैसे निक्कमों के आंदोलन के पश्चात मिलने वाली किसी भी सुविधा का वह उपभोग नहीं करेंगे।
18- वह अपने प्रधानाचार्य को यह लिख कर दे देंगे कि वह स्वेच्छिक रूप से इस आंदोलन से प्राप्त सुविधाओं का उपभोग नहीं करेंगे।
1- सभी अब हड़ताल के बाद अपने- अपने विद्यालयों में पहुँच गए होंगे। राजकीय शिक्षक संघ को नयी उचाईयों पर पहुचाने के लिए आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद।
2- हड़ताल वापस होनी चाहिए थी या नहीं इस पर सबकी अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं हैं।
3- ठीक इसी प्रकार आंदोलन की सफलता व असफलता को भी लोग अपने- अपने नजरिये से परिभाषित कर रहे हैं।
4- कई लोग निराश हैं कि यह नहीं मिला वह नहीं मिला आदि आदि।
5- मेरा आप सब संघ से जुड़े सदस्यों से अनुरोध है कि निराश होना उचित नहीं है।
6- पहली बार राजकीय शिक्षक संघ द्वारा उत्तराखंड बनने के बाद इतना विराट आंदोलन किया गया।
7-यह पहली लड़ाई है, आखरी नहीं।
8- ये होना चाहिए था वो होना चाहिए था, आपके सुझावों का स्वागत है, संघ से जुड़े रहिये मीटिंग में आईये। अपने सुझावों को लिखित रूप में पत्र के माध्यम से अपने संघठन की किसी भी शाखा को भेजिए।
9- नेतृत्व के निर्णय का सम्मान करिये। हर नेतृत्व की अपनी सीमाएँ होती हैं। इन सब ने अपनी क्षमता के अनुसार कार्य किया। हो सकता है किसी के लिए कम हो।
10- आप में कई की क्षमताएं ज्यादा हो सकती हैं, आप अपने नेतृत्व से संघ को और आगे ले जाएँ। आपका स्वागत है।
11- कुछ भी आलोचना या समालोचना करने से पहले इस बात को जरूर ध्यान में रखें कि ब्लॉक् के धरने में क्या हम बिना किसी दिन का ब्रेक लिए सम्मिलित हुए हैं या नहीं ?
12- आंदोलन के दौरान जब निदेशालय में जिले वार ड्यूटी लगायी थी, हम कितने बजे तक आमरण अनशनकारियों के साथ रहे ? या कितने लोग रात को उनके साथ रुके ?
13- आपकी नजर में कोर्ट के निर्णय के बाद आंदोलन को किस तरीके से आगे बढ़ाना चाहिए था,अपने सुझाव संघ को जरूर दें, हो सकता है वह भविष्य में काम आएँ।
14- साथियों , पहली बार नेतृत्व द्वारा इतना बड़ा आंदोलन किया गया, आंदोलन को चलाने के लिए जिस होमवर्क की जरूरत होती है, उसकी कमी बहुत दिखी। पर ऐसा होना स्वाभाविक है, सीखना अनुभव के बाद ही संभव होता है।
15- कितनी मांगे मानी जाएँगी यह तो कुछ दिनों बाद पता चलेगा। पर कोई मुझे पूछे कि इस आंदोलन से क्या मिला ? तो मेरा जबाब है कि सब कुछ मिल गया। क्योंकि राजकीय शिक्षक संघ को उसके सदस्य मिल गए। जगह जगह धरनों में उपस्थित भीड़ व देहरादून की रैली में उमड़ी भीड़ ,मुझे आश्वस्त करती है कि आगे जो भी लड़ायी सरकारों से होगी,जीत हमारी होगी।
16- जिन साथियों द्वारा आंदोलन में प्रतिभाग नहीं किया गया। उनके विचारों का भी मैं स्वागत करता हूँ।वह शायद बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं चाहते थे। उनके आत्मसम्मान ने उन्हें आंदोलन जैसे गलत काम से रोका।
17- मुझे उम्मीद है कि हम जैसे निक्कमों के आंदोलन के पश्चात मिलने वाली किसी भी सुविधा का वह उपभोग नहीं करेंगे।
18- वह अपने प्रधानाचार्य को यह लिख कर दे देंगे कि वह स्वेच्छिक रूप से इस आंदोलन से प्राप्त सुविधाओं का उपभोग नहीं करेंगे।

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