बातों की जलेबी न बनायें
परसों एक प्रिय मित्र का फ़ोन आया,एक लंबे समय बाद। लगभग रात साढ़े बारह बजे। मैंने सोचा मौसम विभाग की सूचना सही हो गयी, जरूर टिहरी में भी कोई आपदा आ गयी । वरना इतनी रात क्यों फ़ोन आएगा । और फ़ोन करने वाले मित्र पोपट लाल की तरह "मिस कॉल" करने के लिए ख्याति प्राप्त हैं। वह आज मिस कॉल नहीं कॉल कर रहे थे ,फिर तो यह कन्फर्म हो गया कि अवश्य उनके क्षेत्र में कोई आपदा आ गयी है। तो उस आपदा की दास्ताँ आप भी सुनिये-
"अरे यार सो गए ?"
-नहीं, मैं तो क्लास ले रहा हूँ।
"क्यों मजाक कर रहा है ?"
- अरे, मजाक तो तुम कर रहे हो।रात के साढे 12 बजे आदमी सोयेगा नहीं तो और क्या करेगा। चल छोड़ बता इतनी रात क्यों फोन किया ? सब कुछ ठीक तो है ?
"खाक ठीक है यार तुमने कन्फ्यूज़ कर दिया"
- मैंने कन्फ्यूज़ कर दिया ? अरे तुमसे तो कई दिनों से बात भी नहीं हुयी ? तुम कहना क्या चाहते हो ?
" अरे ! सरियाल जी की पोस्ट है कि 04 जुलाई तक छुट्टी हैं"
-तो इसमें मेरी क्या भूमिका ? तो छुट्टी होगी ।
" अरे तुमने पोस्ट किया है कि नहीं है, मैं कंफ्यूज हो गया हूँ।"
- मैंने कहा कि सरियाल जी की पोस्ट मेरे बाद की है या पहले की ?
"बाद की"
- तो, फिर कंफ्यूज़न किस बात का ? जो लेटेस्ट है वही सही होगा न ?
" मैंने सोचा कन्फर्म कर लेता हूँ, नींद नहीं आ रही थी।
- तो तुमने सोचा कि उसको क्यों सोने दूँ ?
"नहीं यार सौरी ।"
- तो अब नींद आ जायेगी न ? तो क्या अब सो लिया जाय ?
"ठीक है,यार सॉरी तुम्हारी नींद डिस्टर्ब कर दी।
- कोई नी यार, सो जाओ गुडनाईट ।
(पाँच मिनट बाद जैसे ही नींद आने को हुयी, फिर उनका फोन आ टपका।)
"हैलो, मैं बोल रहा हूँ।"
-हाँ, बोल।
" यार, नाराज मत होना। मैं यह पूछना भूल गया था, कि छुट्टी केवल बच्चों की है या टीचर्स क़ी भी ?
-यार तुमने ये जलेबी का धन्धा कब शुरू किया ?
" यार ये क्या सवाल है, मैं भला जलेबी क्यों बनाने लगा ? अच्छी खासी नौकरी है।"
- वही मैं कह रहा हूँ, ये जलेबी बनाना बंद करो ।बातों को बेवजह जलेबी की तरह घुमाया मत करो। जब विद्यालय बंद हैं,बच्चों की छुट्टी है, फिर टीचर्स की भी छुट्टी हुयी न ?"
"अरे यार, पिछली बार जब DM ने छुट्टी की थी, तो हमने अपने प्रिंसिपल को फोन करके पुछा कि टीचर्स की भी छुट्टी है। तो उसने मना किया ।यार तुम कल हमारे प्रिंसिपल को फोन कर देना।"
-क्यों ? मैं कोई दाऊद इब्राहिम हूँ कि जो वह मुझसे डर जायेगा।
" यार तुम संघ के आदमी हो इसलिये कह रहा हूँ"
- तुमने उसको ऐसा क्यों पुछा कि टीचर्स की छुट्टी है या नहीं ?
" क्या करते यार वह हमारी CL लगा देता"
- कैसे, लगा देता ? अगर लगाता तो अपने शाखा अध्यक्ष/ मंत्री से शिकायत करते ?
" अरे शाखा अध्यक्ष मंत्री तो प्रिंसिपल के चमचे हैं।"
- तो तुम प्रिंसिपल से आदेश मांगते कि कहाँ लिखा है कि टीचर्स की छुट्टी नहीं होगी।
" अरे यार कार्यालय तो खुले रहेंगे, मैंने सुना है।"
- तुम कार्यालय कर्मचारी हो क्या ? कार्यालय तो गर्मियों व सर्दियों की छुट्टियों में, निबंधित अवकाशों में भी खुले रहते हैं। तब तुम घर क्यों जाते हो ?
"हाँ यार, ये बात तो है।"
- तुम जैसे जलेबी बनाने वालों ने पंचायत चुनावों की EL के मामले को इसी तरह उलझा दिया। जब छुट्टियों में काम किया तो नियमानुसार अवकाश मिलेगा न ?
उसकी भी जलेबी बन गयी । तो कृपया बातों की जलेबी न बनायें। एक बज गया है। गुड मॉर्निंग।
"अरे यार सो गए ?"
-नहीं, मैं तो क्लास ले रहा हूँ।
"क्यों मजाक कर रहा है ?"
- अरे, मजाक तो तुम कर रहे हो।रात के साढे 12 बजे आदमी सोयेगा नहीं तो और क्या करेगा। चल छोड़ बता इतनी रात क्यों फोन किया ? सब कुछ ठीक तो है ?
"खाक ठीक है यार तुमने कन्फ्यूज़ कर दिया"
- मैंने कन्फ्यूज़ कर दिया ? अरे तुमसे तो कई दिनों से बात भी नहीं हुयी ? तुम कहना क्या चाहते हो ?
" अरे ! सरियाल जी की पोस्ट है कि 04 जुलाई तक छुट्टी हैं"
-तो इसमें मेरी क्या भूमिका ? तो छुट्टी होगी ।
" अरे तुमने पोस्ट किया है कि नहीं है, मैं कंफ्यूज हो गया हूँ।"
- मैंने कहा कि सरियाल जी की पोस्ट मेरे बाद की है या पहले की ?
"बाद की"
- तो, फिर कंफ्यूज़न किस बात का ? जो लेटेस्ट है वही सही होगा न ?
" मैंने सोचा कन्फर्म कर लेता हूँ, नींद नहीं आ रही थी।
- तो तुमने सोचा कि उसको क्यों सोने दूँ ?
"नहीं यार सौरी ।"
- तो अब नींद आ जायेगी न ? तो क्या अब सो लिया जाय ?
"ठीक है,यार सॉरी तुम्हारी नींद डिस्टर्ब कर दी।
- कोई नी यार, सो जाओ गुडनाईट ।
(पाँच मिनट बाद जैसे ही नींद आने को हुयी, फिर उनका फोन आ टपका।)
"हैलो, मैं बोल रहा हूँ।"
-हाँ, बोल।
" यार, नाराज मत होना। मैं यह पूछना भूल गया था, कि छुट्टी केवल बच्चों की है या टीचर्स क़ी भी ?
-यार तुमने ये जलेबी का धन्धा कब शुरू किया ?
" यार ये क्या सवाल है, मैं भला जलेबी क्यों बनाने लगा ? अच्छी खासी नौकरी है।"
- वही मैं कह रहा हूँ, ये जलेबी बनाना बंद करो ।बातों को बेवजह जलेबी की तरह घुमाया मत करो। जब विद्यालय बंद हैं,बच्चों की छुट्टी है, फिर टीचर्स की भी छुट्टी हुयी न ?"
"अरे यार, पिछली बार जब DM ने छुट्टी की थी, तो हमने अपने प्रिंसिपल को फोन करके पुछा कि टीचर्स की भी छुट्टी है। तो उसने मना किया ।यार तुम कल हमारे प्रिंसिपल को फोन कर देना।"
-क्यों ? मैं कोई दाऊद इब्राहिम हूँ कि जो वह मुझसे डर जायेगा।
" यार तुम संघ के आदमी हो इसलिये कह रहा हूँ"
- तुमने उसको ऐसा क्यों पुछा कि टीचर्स की छुट्टी है या नहीं ?
" क्या करते यार वह हमारी CL लगा देता"
- कैसे, लगा देता ? अगर लगाता तो अपने शाखा अध्यक्ष/ मंत्री से शिकायत करते ?
" अरे शाखा अध्यक्ष मंत्री तो प्रिंसिपल के चमचे हैं।"
- तो तुम प्रिंसिपल से आदेश मांगते कि कहाँ लिखा है कि टीचर्स की छुट्टी नहीं होगी।
" अरे यार कार्यालय तो खुले रहेंगे, मैंने सुना है।"
- तुम कार्यालय कर्मचारी हो क्या ? कार्यालय तो गर्मियों व सर्दियों की छुट्टियों में, निबंधित अवकाशों में भी खुले रहते हैं। तब तुम घर क्यों जाते हो ?
"हाँ यार, ये बात तो है।"
- तुम जैसे जलेबी बनाने वालों ने पंचायत चुनावों की EL के मामले को इसी तरह उलझा दिया। जब छुट्टियों में काम किया तो नियमानुसार अवकाश मिलेगा न ?
उसकी भी जलेबी बन गयी । तो कृपया बातों की जलेबी न बनायें। एक बज गया है। गुड मॉर्निंग।
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