"सर्जिकल स्ट्राइक"


साथियों,
1- स्कूलों को ISI के ठिकाने समझ कर ।
2- मास्टरों को आतंकवादी समझकर, जो हमारे अधिकारी घात लगाकर छापा मारते हैं।
3- अब समझ आया कि वह उनकी तरफ से की गयी "सर्जीकल स्ट्राइक" होती है।
4- उनकी प्लानिंग इतनी पक्की होती है कि सेना की टाइमिंग मिस हो जायेगी पर उनकी टाइमिंग कभी मिस नहीं होती।
5- वह ठीक अगर 09 :45 बजे स्कूल है, तो 09:30 पर पहुँच जाते हैं , जो आतंकवादी लेट हो गया उसको धर दबोचते हैं। (यह अलग बात है कि अपने ऑफिस इतनी जल्दी पहुँचते, वह यदा-कदा ही देखे जाते हैं)।
6- या फिर 3:50 छुट्टी का टाइम है । वह ठीक 3:45 पर स्कूल में पहुँच जायेंगे और जो आतंकवादी शिविर छोड़ देते हैं, उनका नाम पाकिस्तानी सेना में शामिल कर दिया जाता है।
7- उसके बाद बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है, जिसमें पकडे गए आतंकवादियों के नाम उजागर किये जाते हैं।
8- और पूरे प्रान्त को बताया जाता है कि हमने कितने बजे छापा मारा, कैसे- कैसे हमने इस "सर्जीकल स्ट्राइक" को अंजाम दिया।
9- दूसरे दिन पूरे मीडिया जगत में और अभिभावकों में सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा रहती है।
10- उसके कुछ दिनों तक जो डरपोक आतंकवादी होते हैं, लेखक की तरह, अपनी घडी 01 घंटा आगे कर बिना खाना खाये ही 09 बजे स्कूल पहुँच जाते हैं।
11- और गलती से अगर 3:30 पर टॉयलेट लग जाय , तो तब तक रोके रखते हैं जब तक छुट्टी की घंटी न लग जाय। फिर बाथरूम की तरफ ऐसा भागते हैं, जैसे स्कूल में परमाणु हमला हो गया हो और वह बंकर की तलाश में हों।
12- पहले मैं अपने छोटे से दिमाग में यह सोचता था कि स्कूल में छापे का क्या मतलब ? अधिकारी आएं बैठें और मास्टरों से बात करें ? छात्रों से बात करें ?
13- अब मुझे सब समझ आ गया, आतंकवादियों के ठिकानों पर "सर्जीकल स्ट्राइक" होना सामान्य बात है।
14- जरूरी नहीं की दिमाग की बत्ती जलाने के लिए हर बार "मेंटोस" ही खायी जाय। वह भी जब दिमाग मास्टर का हो।
15- कुछ लोग तो यहाँ तक कहते सुने गए हैं कि मास्टरों को "मेंटोस" खाने की जरूरत क्या है । क्योंकि उसपे दिमाग होता ही कहाँ है ?

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