"भाई जी मेरी ड्यूटी फलाणी जगह लगा देना"

"भाई जी मेरी ड्यूटी फलाणी जगह लगा देना"
1- जैसे ही बोर्ड परिक्षाओं की तिथि नजदीक आती है,यह डाइलोग यत्र-तत्र सुनायी देने लगता है।
2- बोर्ड परीक्षा 2017 हेतु कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी का कार्यक्रम ब्लॉक स्तर पर गतिमान है।
3- इसमें रसूख वाले शिक्षकों की ड्यूटी उनके अनुसार तय कर दी जाती है।
4- रसूख वालों की भी अलग-अलग श्रेणियां होती हैं।( इस लेख में, मैं जिले स्तर तक की श्रेणियों का जिक्र कर रहा हूँ)।
5- प्राथमिक श्रेणी में वह आते हैं , जिनकी जिला शिक्षा अधिकारी से सीधी पहचान होती है। उनकी सेटिंग जिला शिक्षा अधिकारी की फ्लाइंग टीम में होती है।

6- द्वितीयक श्रेणी में डीईओ माध्यमिक से जान-पहचान वाले आते हैं। और यह उनकी फ्लाइंग टीम का हिस्सा होते हैं।
7- तृतीयक श्रेणी में डीईओ बेसिक से जान -पहचान वाले होते हैं,और उनकी फ्लाइंग टीम के हिस्सा होते हैं।
8- चतुर्थ श्रेणी में डाइट के प्राचार्य की टीम होती है।
9- पंचम श्रेणी में बीइओ की टीम के लोग होते हैं, इनमें ब्लॉक शिक्षक संग़ठन के पदाधिकारी भी कभी-कभी सम्मिलित देखे जा सकते हैं। कभी-कभी सीआरसी भी इस श्रेणी में देखे गये हैं। इस श्रेणी में गाड़ी वाले को प्राथमिकता दी जाती है।
10- सष्टम श्रेणी में आते हैं वह लोग जिनकी बाबु भैयाओं से खूब पटती है। इनकी ड्यूटी फ्लाइंग में तो एडजस्ट नहीं हो पाती पर इनके मनपसंद स्कूल में लग जाती है।
11- सातवीं श्रेणी में वह लोग आते हैं, जिन्होंने संघ के पदाधिकारियों को जिताने में अतिरिक्त प्रयास किया हो। उनकी भी उनकी पसंद के स्कूल में ड्यूटी लग जाती है।
12- आठवीं श्रेणी में वह आते हैं , जो गांधी जी की सहायता लेते हैं। इनका संघ-वंग से ज्यादा लेना देना नहीं होता। यह जानते हैं गांधी जी के फोटो देखने के बाद भला कौन मना कर सकता है।इनकी भी अपने मन पसंद स्कूल में ड्यूटी लग जाती है।
13- कंट्रोल रूम, माइक्रोऑब्जरबर और भी कई श्रेणियां होती है। उनका जिक्र इसलिए नहीं कर रहा हूँ क्योंकि लेख लंबा हुआ तो आप पढ़ेंगे नहीं।
11- सबसे निम्न श्रेणी उन शिक्षकों की होती है,जो शिक्षक रसूखदार नहीं होते(लेखक की तरह)।
12- ऐसे शिक्षक दुर्गम के विद्यालयों में छूट जाते हैं। उनको 20 से 30 किमी0 से भी अधिक दूर के परीक्षा केंद्रों में ड्यूटी हेतु भेज दिया जाता है।
13- ऐसे में उनको दोहरे अन्याय का शिकार होना पड़ता है। अगर वह इस अन्याय की शिकायत अधिकारियों से करते हैं। तो उनको आँखें दिखाई जाती हैं, नौकरी नहीं करनी ?
14- और संघ के पदाधिकारियों से शिकायत करें , तो हाथ जोड़- जोड़ कर तो उन्होंने अपना जुगाड़ फ्लाइंग में किया होता है। वह विरोध करें तो किस मुहँ से ?
15- हम जैसे लोगों की समस्या यह नहीं कि औरों की ड्यूटी उनकी पसंद के अनुसार क्यों लगी ? किसी को सुविधा मिलती है तो हमको को क्या परेशानी ?
16- बस इतनी गुजारिश है कि हमारी परेशानी का भी ध्यान रखा जाय। ड्यूटी निकटम विद्यालयों में लगायी जाय।
17- यदि ड्यूटी 10 किमी0 से दूर लगे तो नियमानुसार टीए दिया जाय।
18- क्या इस बार संघ से जुड़े लोग मुझ जैसे निम्न श्रेणी के शिक्षकों का खयाल रखेंगे ?

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