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अक्टूबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

"हंगामा है क्यों वरपा ?"

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अभ्रष्ट वन में आज बड़ा हंगामा वरपा था। क्योंकि एक गाय ने शेर पर सोसल मीडिया में माँसाहारी होने का आरोप लगा दिया था। और तो और उस गाय ने शेर के मातहत 'लक्कड़बग्गों' पर भी मांसाहारी होने के आरोप मड़ दिये थे।  सुना है लक्कड़बग्गों के संग़ठन ने उस गाय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। और यह मुद्दा अखबारों की हेड लाइन न बने यह कैसे हो सकता था, आज सारे अखबारों में इस खबर को पढ़ा जा सकता  है। पर गाय ने ऐसी हिम्मत कैसे कर दी ? नया-नया खोजी पत्रकार पोपट लाल यही सोच कर परेशान था। पोपट लाल ने जब जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह गाय एक शिक्षक थी। आज अभ्रष्ट वन में इसी सिलसिले में शेर ने एक मीटिंग बुलाई थी। उसमें आरोपी गाय व लक्कड़बग्गे व मीडिया का भारी जमावाड़ा था। पत्रकार पोपट लाल भी यह सब कवर करने अभ्रष्ट वन में गये थे। मीटिंग शुरू होने से पहले अन्य जानवरों में खुश-पुश हो रही थी कि गाय ने क्या गलत बोला ? सही बात तो बोली। पर कोई भी गाय के सीधे सपोर्ट में नहीं आया। गाय की अपनी बिरादरी भी गाय को अपने से अलग करने का मन बना चुके थे। कुल मिला कर गाय को अपने कुनबे का साथ मिलने के दरवाजे भी बंद हो चुके थे।...

ड्रेस ड्रेस ड्रेस ......

वैसे इस मुद्दे पर मेरी राय का कोई महत्व तो नहीं है,पर क्योंकि कुछ मित्र मेरी राय जानना चाहते हैं और इस पर मेरी पोस्ट का भी इंतजार कर रहे हैं। तो मुझे लगा लिख लेता हूँ। ... ड्रेस कोड के संबंध में मेरे मन में कुछ सवाल हैं- 1- ड्रेस क्यों जरूरी होती है ? 2- ड्रेस कोड से शिक्षकों के शिक्षण में क्या कोई अंतर आयेगा ? 3- अचानक सरकार को शिक्षकों के लिये ड्रेस कोड की जरूरत क्यों महसूस हुयी ? 4- सरकार ड्रेस कोड लागू करके किन उद्देश्यों की पूर्ती करना चाहती है ? ... 1- ड्रेस क्यों जरूरी होती है ? -- जहाँ तक मेरा सोचना है ड्रेस की जरूरत समानता के लिये होती है, खासकर विद्यालयों के परिपेक्ष्य में। इसीलिये एक जैसी ड्रेस को यूनिफॉर्म कहते हैं। विद्यालय में बच्चों में अमीरी-गरीबी का भेद न रहे। बच्चों में हीनता की भावना न पनपे । इसलिये यूनिफार्म को लागू किया गया होगा। दूसरा यूनिफार्म बच्चों में अनुसाशन की भावना विकसित करती है। ● अगर इस नजरिये से देखें तो मुझे नहीं लगता कि शिक्षकों को ड्रेस की जरूरत है। क्योंकि लगभग सभी शिक्षकों को उनके पद के वेतनक्रम के अनुसार बराबर सेलरी मिलती है। शिक्षकों में BPL जैस...

क्या वोट देकर सरकार बनाना ही लोकतंत्र है ?

1- आप सोच रहे होंगे कि आज मैं यह क्या लेकर बैठ गया ? ... 2- अखबारों में यह पढ़कर बड़ा दुख हुआ कि एक शिक्षक को मात्र इस बिना पर निलंबित कर दिया कि वह बिना अनुमति DM से मिले थे। ... 3- यह जो कर्मचारी आचार सहिंता बनी है, वह अंग्रेजों के समय की यानी गुलामी की याद दिलाती है। क्योंकि बड़े पदों पर अंग्रेज हुआ करते थे। और छोटे पदों पर हिंदुस्तानी। ... 4- अब एक आम और निम्न हिंदुस्तानी कर्मचारी का बड़े साहब से बिना इजाज़त मिलना कैसे गँवारा किया जा सकता था ? ... 5- वह भी उस दौर में जब बंगलों के बाहर लिखा रहता था कि हिंदुस्तानियों और कुत्तों का अंदर आना मना है। ... 6- तब की परिस्थियाँ और थी। हम एक गुलाम देश थे। आज की परिस्थितयां अलग हैं। ... 7- आज हम एक लोकतांत्रिक देश हैं। किसी छोटे कर्मचारी को बड़े अधिकारी से मिलने से रोकनेे के वर्तमान नियम मेरी राय में लोकतांत्रिक तो नहीं ही हैं ? ... 8- अगर कोई छोटा कर्मचारी किसी कार्य से बिना अनुमति अपने अधिकारी से श्रेणी क्रम में बड़े अधिकारी से मिलता है, तो इससे कौन सा पहाड़ टूट जायेगा ? ... 9- कोई कर्मचारी अगर किसी अधिकारी से मिलने जाता है तो जाहिर है, वह किसी का...

"ड्रेस का फतवा"- भाग-4

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भाग-4 ... "आप ने मेरी बात का जबाब नहीं दिया ?" नेगी जी के सवाल ने मेरी तंद्रा तोड़ी और मैं वापस उनके साथ लौट आया। "नहीं सर, मैं ऐसा नहीं मानता कि शिक्षक पढ़ाते नहीं हैं। ऐसी समाज में एक धारणा बना दी गयी है,मुझे तो यही महसूस होता है,सर । मैं खुद पहले पब्लिक स्कूल में पढ़ाता था। पब्लिक स्कूलों की भी अलग-अलग श्रेणियां हैं। हालांकि यह कोई ऑफिसियल श्रेणियां नहीं हैं। पर ऐसा बेरोजगारी के दौरान आवेदन के समय हम दोस्त मानते थे। कुछ ऐसे स्कूल हैं जिनकी फीस लाखों में है। कुछ ऐसे हैं जिनकी हजारों में है। और कुछ ऐसे हैं जिनकी फीस सैकड़ों में है। सामान्यत: अधिकांश स्कूल ऐसे हैं जिनकी फीस एक हजार से पाँच हजार प्रतिमाह है। और सबसे ज्यादा एडमिशन हेतु भीड़ इन्हीं स्कूलों में है। अधिकांश अभिभावक इसी दायरे में आते हैं जो इस फीस को अफोर्ड कर सकते हैं। भीड़ है, तो छंटनी भी है। और सभी अच्छे को ही लेना चाहते हैं । और ले भी लेते हैं। जो बचते हैं उनके लिये भी दो सौ से पांच सौ तक की फीस में स्कूल उपलब्ध हैं। और इतना तो ध्याड़ी-मजदूरी करने वाले भी अफोर्ड कर लेते हैं। आजकल तो पब्लिक स्कूल में बच...