ड्रेस ड्रेस ड्रेस ......


वैसे इस मुद्दे पर मेरी राय का कोई महत्व तो नहीं है,पर क्योंकि कुछ मित्र मेरी राय जानना चाहते हैं और इस पर मेरी पोस्ट का भी इंतजार कर रहे हैं। तो मुझे लगा लिख लेता हूँ।
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ड्रेस कोड के संबंध में मेरे मन में कुछ सवाल हैं-
1- ड्रेस क्यों जरूरी होती है ?
2- ड्रेस कोड से शिक्षकों के शिक्षण में क्या कोई अंतर आयेगा ?
3- अचानक सरकार को शिक्षकों के लिये ड्रेस कोड की जरूरत क्यों महसूस हुयी ?
4- सरकार ड्रेस कोड लागू करके किन उद्देश्यों की पूर्ती करना चाहती है ?
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1- ड्रेस क्यों जरूरी होती है ?
-- जहाँ तक मेरा सोचना है ड्रेस की जरूरत समानता के लिये होती है, खासकर विद्यालयों के परिपेक्ष्य में। इसीलिये एक जैसी ड्रेस को यूनिफॉर्म कहते हैं। विद्यालय में बच्चों में अमीरी-गरीबी का भेद न रहे। बच्चों में हीनता की भावना न पनपे । इसलिये यूनिफार्म को लागू किया गया होगा। दूसरा यूनिफार्म बच्चों में अनुसाशन की भावना विकसित करती है।
● अगर इस नजरिये से देखें तो मुझे नहीं लगता कि शिक्षकों को ड्रेस की जरूरत है। क्योंकि लगभग सभी शिक्षकों को उनके पद के वेतनक्रम के अनुसार बराबर सेलरी मिलती है। शिक्षकों में BPL जैसी कोई कैटेगरी नहीं है। सभी जैसा चाहें वैसे कपड़े पहन सकते हैं। हाँ पहले ऐसा जरूर था कि कला, व्यायाम जैसे विषयों के शिक्षकों को कम वेतन मिलता था और गणित,विज्ञान के शिक्षकों को ज्यादा। ( यह सूचना सुनी-सुनायी बातों पर आधारित है, इसलिये इसकी सत्यता के बारे में कह नहीं सकता कि ऐसा था ही )पर अब ऐसा कुछ नहीं है। जब उस समय भी यूनिफार्म का प्रावधान नहीं था तो अब क्यों ? जहाँ तक अनुसाशन की बात है, यह पाठ शिक्षक विद्यार्थी जीवन में सीख चुके हैं। हाँ, अगर आप यह मानते हैं कि उनमें अनुसाशन की कमी है तो फिर उसको प्रशिक्षण की जरूरत है न कि ड्रेस की।
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2- ड्रेस कोड से शिक्षकों के शिक्षण में क्या कोई अंतर आयेगा ?
-- अगर माना ड्रेस कोड लागू हो गया। क्या खास ड्रेस पहनने से शिक्षण कार्य बेहतर हो जायेगा ? हाल फिलहाल ऐसी कोई रिसर्च सामने नहीं आयी। मेरे व्यक्तिगत 18 साल के शिक्षण कैरियर में यह अनुभव कभी नहीं रहा कि किन्ही खास कपड़ों में बच्चों को मेरा पढ़ाया ज्यादा समझ आया हो।
और अगर ड्रेस की शिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका प्रमाणित हो जाती तो शिक्षकों के लिये राष्ट्रीय स्तर पर ही ड्रेस कोड निर्धारित कर दिया जाता। पर ऐसा नहीं है।
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3- अचानक सरकार को शिक्षकों के लिये ड्रेस कोड की जरूरत क्यों महसूस हुयी ?
-- कुछ लोगों का मानना है कि कुछ शिक्षक गरिमामय कपड़ों में विद्यालय नहीं आते। जिससे बच्चों पर उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हो सकता है, यह बात सरकार के संज्ञान में आयी हो और सरकार ड्रेस कोड के बारे में सोची हो। पर अगर ऐसा है तो सरकार यह आदेश निकाल सकती थी कि सभी शिक्षक गरिमामय ड्रेस ( जो शिक्षण प्रोफेशन के अनुकूल हो) पहनकर विद्यालय में आयें । खास रंग के कपड़े ही पहनने होंगे, यह कुछ ज्यादती लग रही है।
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4- सरकार ड्रेस कोड लागू करके किन उद्देश्यों की पूर्ती करना चाहती है ?
-- अगर सरकार कोई अन्य उद्देश्यों को लेकर ड्रेस कोड लागू कर रही है, तो उन उद्देश्यों को शिक्षकों के सामने रखा जाना चाहिये।
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ड्रेस कोड के बारे में मेरी राय -
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1- सबसे पहले सरकार को शिक्षक संगठनो को बुलाकर अपनी बात रखनी चाहिये। अगर वह ड्रेस कोड लागू करने के पीछे के उद्देश्यों से शिक्षक संगठनो को संतुष्ट कर सके, तो फिर ड्रेस कोड अपने आप ही लागू हो जायेगा। एक तरफा आदेश टकराव को ही जन्म देगा।
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2- अगर सरकार ने ड्रेस कोड लागू करने को प्रतिष्ठा का विषय बना लिया हो, और वह चाहती है कि ड्रेस कोड लागू होना ही चाहिये, तो एक रास्ता है । कुछ शिक्षक ड्रेस कोड के पक्ष में भी हैं। सरकार शिक्षकों की ड्रेस तय कर ले और शिक्षकों को बता दे। और फिर शिक्षकों के ऊपर छोड़ दे, कि जो चाहता है वह ड्रेस पहन लें और जो नहीं चाहता उस पर जबरदस्ती नहीं है। ऐसे में किसी को भी ऐतराज नहीं होगा। अगर ड्रेस के कुछ लाभ नजर आयेंगे तो फिर सभी खुद ही अपना लेंगे।
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3- सबसे बेहतर तो यही होगा कि सरकार यह आदेश निकाले कि सभी शिक्षक/शिक्षिकायें विद्यालय गरिमामय ड्रेस में जायें । क्योंकि पहनावा व्यक्तिगत मामला होता है, जब तक कि आप किसी खास प्रोफेसन में नहीं हो जहां पहले से ही ड्रेस की अनिवार्यता हो। इसीलिये अपवादों को छोड़ दें तो विश्वविद्यालयों में ड्रेस की अनिवार्यता नहीं होती। शिक्षकों को तो छोड़ ही दें, छात्रों के लिये भी नहीं।

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