क्या वोट देकर सरकार बनाना ही लोकतंत्र है ?


1- आप सोच रहे होंगे कि आज मैं यह क्या लेकर बैठ गया ?
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2- अखबारों में यह पढ़कर बड़ा दुख हुआ कि एक शिक्षक को मात्र इस बिना पर निलंबित कर दिया कि वह बिना अनुमति DM से मिले थे।
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3- यह जो कर्मचारी आचार सहिंता बनी है, वह अंग्रेजों के समय की यानी गुलामी की याद दिलाती है। क्योंकि बड़े पदों पर अंग्रेज हुआ करते थे। और छोटे पदों पर हिंदुस्तानी।
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4- अब एक आम और निम्न हिंदुस्तानी कर्मचारी का बड़े साहब से बिना इजाज़त मिलना कैसे गँवारा किया जा सकता था ?
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5- वह भी उस दौर में जब बंगलों के बाहर लिखा रहता था कि हिंदुस्तानियों और कुत्तों का अंदर आना मना है।
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6- तब की परिस्थियाँ और थी। हम एक गुलाम देश थे। आज की परिस्थितयां अलग हैं।
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7- आज हम एक लोकतांत्रिक देश हैं। किसी छोटे कर्मचारी को बड़े अधिकारी से मिलने से रोकनेे के वर्तमान नियम मेरी राय में लोकतांत्रिक तो नहीं ही हैं ?
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8- अगर कोई छोटा कर्मचारी किसी कार्य से बिना अनुमति अपने अधिकारी से श्रेणी क्रम में बड़े अधिकारी से मिलता है, तो इससे कौन सा पहाड़ टूट जायेगा ?
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9- कोई कर्मचारी अगर किसी अधिकारी से मिलने जाता है तो जाहिर है, वह किसी काम के सिलसिले में ही गया होगा ? कमसे कम यह तो तय है कि गप्पें मारने तो नहीं ही जायेगा ?
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10- जब एक सामान्य नागरिक अपनी समस्या के लिये किसी भी अधिकारी या नेता से बिना अनुमति मिल सकता है तो कर्मचारी क्यों नहीं ?
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11- क्या सरकारी कर्मचारी होने से नागरिक के रूप उसका किसी अधिकारी से कार्यबस मिलने के अधिकार को निलंबित करना उचित है ?
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12- और शिक्षक के साथ तो यह बिल्कुल नहीं होना चाहिये क्योंकि शिक्षक को सरकारी वेतन लेने के बावजूद भी कर्मचारी नहीं समझा जाता।
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13- शिक्षक ही हैं जिनको जनप्रतिनिधियों के साथ मंच शेयर करने की अनुमति होती है।
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14- शिक्षक का पद बहुत गरिमामय होता है। सब पदों से श्रेष्ठ। यही कारण है कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ0 कलाम ने अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद एक शिक्षक के रूप कार्य किया । यह शिक्षक पद की गरिमा बताने के लिये काफी है।
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15- मेरा शिक्षक संगठनो के प्रतिनिधियों से निवेदन है कि उनको आचरण सहिंता के ऐसे अलोकतांत्रिक नियमों को संसोधित करवाने के लिये भी कार्य करना चहिये। और ऐसे नियमों को जोड़ने के प्रयास किये जाने चाहिये जो शिक्षकों की गरिमा को बढ़ाने का कार्य करते हों।
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16-क्योंकि मेरा मानना है कि एक लोकतातंत्रिक देश में नियम कानून केवल शिक्षकों के लिये नहीं , बल्कि सभी के लिये लोकतंत्र की भावना के अनुरूप होने ही चाहिये।

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