चाय पर चर्चा- भाग-4
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भाग-4
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"आप कह रहे कि हैं यह स्कूल बंद नहीं होने चाहिए। इन स्कूलों में मुश्किल से चार या पांच बच्चे पढ़ रहे हैं। आपको नहीं लगता कि इन विद्यालयों को चलाते रहने पर सरकार को काफी नुकसान होगा" यह सवाल पहले वाले सज्जन ने किया। जिन्होंने इस चर्चा की चिंगारी को सुलगाया था।तब तक उन तीसरे भाई साहब का फोन आ गया।
"हेलो..हेलो... आवाज नहीं आ रही...आवाज रुक-रुक कर आ रही है...।"
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"हां, हां मैं रजनीश बोल रहा हूँ....।"
मैं केवल एक तरफ की आवाज सुन पा रहा था। तो इन भाई साहब का नाम रजनीश है, यह मुझे पता चल गया।
"नहीं यार...मैंन वहाँ छोड़ दिया...।"
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"कुछ भी और कर लूँगा....."
"कुछ भी............."
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"जो मन को अच्छा लगेगा"
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"इस समय ? इस समय तो मैं चाय पी रहा हूँ।"
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"ओके, बाय... बाद में बात करता हूँ"
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"देखो, राजेश भाई, सरकार कोई बनिये की दुकान नहीं है, जो नफा-नुकसान से चलेगी। सरकार की भूमिका एक पिता व अभिभावक की होती है,
मालिक की तरह नहीं"- रजनीश ने कहा।
बीच में रजनीश ने एक चाय की सिप ली, जिससे बातचीत में एक अल्पविराम आ गया। मैंने भी मौके की नजाकत को देखते हुये एक सिप ली। थोड़ी देर फिर चुप्पी छा गयी।
रजनीश ने फिर बातचीत की गेंद को अपने पाले में लेते हुये कहा-
"आप लोगों को पता है कि पड़ोसी राज्य की जनसंख्या कितनी है ?"
" पड़ोसी राज्य की जनसंख्या का इस चर्चा से क्या संबंध है ?" राजेश ने सवाल पूछा।
"सबन्ध है, पहले आप बताओ तो सही ?"-रजनीश ने कहा।
मेरी समझ भी नहीं आया कि बात इस राज्य की हो रही है। वह पड़ोसी राज्य कैसे चले गये। रजनीश मुझे शुरू से रहस्यमयी नजर आ रहे थे। मैं सोच रहा था कि पड़ोसी राज्य में भी स्कूल बंद हुये होंगे क्या ? तभी राजेश ने कहा पड़ोसी राज्य की जनसंख्या का तो हमको अंदाजा नहीं है।
"चलो अपने राज्य की जनसंख्या का अंदाजा हो तो वही बता दो"- रजनीश ने फिर सवाल किया।
इस पर भी दोनों सज्जनों ने फिर इनकार में सिर हिला दिया। मुझे लगा कि वह बच्चों की संख्या और स्कूलों की संख्या का कोई आंकड़ा बताने वाले हैं।
रजनीश ने चर्चा को फिर से अपने हाथों में ले लिया -
"पड़ोसी राज्य की जनसंख्या लगभग 22 करोड़ है। और हमारे प्रदेश की लगभग एक करोड़। पड़ोसी राज्य में असेम्बली सीटों की संख्या लगभग चार सौ है और हमारे यहां 72 है।"
मुझे अभी भी समझ नहीं आ रहा था कि इस चर्चा में जनसंख्या और असेम्बली सीट कहाँ से आ गये।
"पड़ोसी राज्य की जनसंख्या 22 करोड़ है और असेम्बली सीट 400 हैं, तो इस प्रकार लगभग पांच लाख पर एक असेम्बली सीट हुयी। हमारी जनसंख्या एक करोड़ के लगभग है और अगर पड़ोसी राज्य को आधार मानें तो हमारे यहाँ मात्र 20 असेम्बली सीट होनी चाहिये। क्यों सही कह रहा हूँ न मैं ?"- रजनीश ने अपने दोनों साथियों से पूछा। उन्होंने कोई जबाब नहीं दिया।
गणित में मेरे हाथ कमजोर हैं। हाईस्कूल में कृपांक से पास हुआ हूँ। मैंने मोबाइल निकाला और गणना करने के लिये मोबाइल का कैलकुलेटर खोलना चाहा। पर तब तक रजनीश चर्चा को आगे बढ़ा चुके थे। मुझे फिर मोबाइल जेब के हवाले करना पड़ा।
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रजनीश जी ने अपनी बात को आगे बढ़ाया- "हमारे यहाँ इस प्रकार 20 असेम्बली सीट होनी चाहिये और हैं 72 । मतलब 52 असेम्बली सीट ज्यादा हैं। क्या कभी आपने सवाल किया कि इससे सरकार को नुकसान हो रहा है ?
केवल स्कूलों से लोगों को दिक्कत क्यों है ?
क्या कभी लोग यह भी आवाज उठायेंगे कि जिन गांवों से लोगों का 50 प्रतिशत से ज्यादा पलायन हो गया हो। वहां की असेम्बली सीट समाप्त कर देनी चाहिये ?"
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