प्रांतीय अधिवेशन ......भाग-15
..15..
"देखो तुम्हारी चंडीगढ़ वाली बुआ का फोन आया था। वहाँ उसने एक लडक़ी देखी है। कह रही थी कि लड़की पढ़ी-लिखी है और इस समय चौदहवीं में पढ़ रही है। अपनी ही रिश्तेदारी में है। तुम छुट्टी आये ही हो, कल हम चंडीगढ़ चल रहे हैं।"अब मैं पापा को क्या समझाता की चौदहवीं कोई कक्षा नहीं होती ।
......
हमारी चाय भी आ गयी । "और कुछ लेंगे ?"- महावीर जी ने मुझसे पूछा। मैंने न में सिर हिला दिया। थोड़ी देर हम चुप हो गये। "फिर क्या हुआ ?"- मैंने चुप्पी को तोड़ने के लिये कहा।
"होना क्या था, हम दूसरे दिन चंडीगढ़ गये। तीसरे दिन लड़की वालों के घर गये। लड़की के पापा इंजीनियर थे। इंजीनयर साहब की एक लड़की और एक लड़का था। लड़की दिखने में मुझसे बेहतर ही थी। बातचीत के दौरान लड़की ने कह दिया कि मेरी प्राथमिकता में टीचर नहीं है। क्योंकि वह काफी बोरिंग होते हैं। अप्रत्यक्ष रूप से यह भी समझा दिया कि, मुझे तुममें कोई खास इंटरेस्ट नहीं है। और सीधे-सीधे यह भी बता दिया कि देखो मुझे पढ़ाई-लिखाई से भी कोई खास मतलब नहीं है। मैं तो सोच रही हूँ कि कब शादी हो और कब मैं यह पढ़ना छोड़ूं।"
.....
"जब बुआ के घर वापस लौटे तो सभी मुझसे पूछने लगे कि लड़की कैसी लगी ? मेरा मन हुआ कि बोल दूँ कि मुझे पसंद नहीं आयी। पर यह झूठ होता। हाँ, उसका एकेडमिक और पढ़ने से अरुचि मुझे खल रही थी। मुझे पता था कि लड़की ने कह दिया था कि उसकी प्राथमिकता में टीचर नहीं है। इसलिये वह ही मना कर देगी। खुद किसी लड़की को न बोलना मुझे अच्छा नहीं लग रहा था।"
"मैंने सच-सच सबको बता दिया कि लड़की की पढ़ाई- लिखाई थोड़ा कम है,पर लड़की अच्छी है। और यह भी बता दिया कि लड़की को मैं पसन्द नहीं हूँ, क्योंकि वह किसी टीचर से शादी नहीं करना चाहती। सब मुझे कह रहे थे कि जरूर, तुमने कुछ टीचरों वाले प्रश्न पूछे होंगे। तभी उसने मना किया। अब मैं उनको क्या बताता कि जो भी दस-पंद्रह मिनट हम बैठे, उसमें मैंने केवल हां,हूँ ही किया। सारे समय वही बोलती रही।"
इतना बोलने के बाद महावीर जी फिर चुप हो गये।
.....
मैं बड़ी दुविधा में था कि जब इस चंडीगढ़ वाली लड़की ने महावीर जो को मना कर दिया था। तो फिर उसकी कहानी मुझको क्यों सुना रहे हैं ? हमारे पास समय भी कम था। क्योंकि मुख्यमंत्री जी सम्मेलन में पहुँचने वाले होंगे। मैं उनको भी सुनना चाहता था।
मैंने अपनी शंका महावीर जी के सामने रखी- " सर, जब इस लड़की ने आपको मना कर दिया था। तो फिर इसकी कहानी सुनाने से क्या फायदा ? आप भाभी जी के बारे में बताओ कि आखिर झगड़ा किस बात पर हो रहा है ? वैसे मैं आपको एक बार फिर कह रहा हूँ कि मुझे नहीं लगता कि मैं आपकी कोई मदद कर पाउँगा।"
"मुझे मालूम है कि इसका हल आपके पास है।"- महावीर जी ने फिर अपनी बात दोहरा दी।
"चलो ठीक है,आप जल्दी से झगड़े का कारण बताओ ?"- मैंने कहा।
"वही बताने की कोशिश कर रहा हूँ। जब तक हम बात की जड़ तक नहीं पहुंचेंगे, तब तक बात नहीं बनेगी।"- महावीर जी ने कहा।
"तो क्या यह चंडीगढ़ वाली लड़की आप दोनों के बीच के झगड़े की जड़ है ?"
....
( जारी..)
....
टिप्पणियाँ