प्रांतीय अधिवेशन ......भाग-16


..16...
"तो क्या यह चंडीगढ़ वाली लड़की आप दोनों के बीच के झगड़े की जड़ है ?"
"जी"
"लेकिन कैसे ?" मैंने आश्चर्य से पूछा।
....
चंडीगढ़ से आये मुझे एक हफ्ता हो गया था। मैं अपने स्कूल भी आ चुका था। एक दिन मैं स्कूल में अपनी घण्टी पढ़ा रहा था। मैं सामान्यतः क्लास में जाने से पहले अपना फोन साइलेंट कर देता हूँ। क्योंकि मुझे क्लास के दौरान फोन उठाना पसंद नहीं। पर उस दिन मैं फोन को साइलेंट मोड़ पर डालना भूल गया। मुझे एक अनजान नंबर से फोन आ गया। रिंगटोन बजते ही मैंने फोन को काट दिया। उस नंबर से फिर फोन आ गया। मैंने फिर काट दिया। पर तीसरी बार जब फोन आया तो मुझे लगा कि कोई अर्जेंट कॉल होगी, नहीं तो कोई इतनी बार क्यों फोन करेगा ? मैं फोन को रिसीव करने क्लास से बाहर आ गया। उधर से आवाज आयी- "हेलो"
"हेलो"- मैंने भी जबाब दिया।
"क्या आप नाराज हो ?"
"जी, ना.. रा.. ज ? लगता है आपने गलत नंबर मिला दिया। सॉरी।"
"आप महावीर बोल रहे हैं न ?"
"जी, पर मैंने आपको पहचाना नहीं ?"
"मैं निकिता बोल रही हूँ"
"कौन निकिता ? मैं किसी निकिता को नहीं जानता ?"
और मैंने घबरा कर फोन काट दिया।
"अब ये निकिता कौन आ गयी ?"- मैंने पूछा।
....


महावीर जी ने मेरे सवाल का जबाब नहीं दिया। और बोलना जारी रखा। 
"थोड़ी देर में फिर उसी नंबर से फोन आ गया। मैंने उठाया नहीं। उसने फिर दो-तीन बार फोन किया। मैंने फोन को साइलेंट कर दिया। आधे घण्टे बाद उसने किसी और नये नंबर से फोन कर दिया। उसे मैंने रिसीव कर दिया।"
"हेलो,मैं निकिता बोल रही हूँ। प्लीज फोन मत रखना। मुझे आप से कुछ बात करनी है।"
"पर मैडम मैं तो किसी निकिता को नहीं जानता ?"
"पिछले हफ्ते तो मिले थे हम। आप चंडीगढ़ आये थे हमारे घर।"
"ओह, सॉरी। मुझे ध्यान नहीं रहा।" - मैंने कहा। 
मुझे लगा कि वह सच ही कह रही थी कि टीचर बोरिंग होते हैं। मैं उससे मिलने गया था। और मैंने उसका नाम क्या है, यह भी नहीं पूछा।
"आपको उस दिन मेरा व्यवहार बुरा लगा होगा न ? मुझे आपसे वैसी बातें नहीं करनी चाहिये थी।"- निकिता ने कहा।
" नहीं,नहीं, मुझे कुछ बुरा नहीं लगा। वैसे आपने ऐसा कुछ क्या कहा, जो बुरा लगे ?"
"यही कि मुझे टीचर्स में इंटरेस्ट नहीं है, वह काफी बोरिंग होते हैं।"
"इसमें बुरा लगने वाली बात क्या है ? यह केवल आपकी सोच नहीं, अधिकांश लड़कियाँ ऐसा ही सोचती हैं। आखिर हर किसी की अपनी सोच होती है। हमको उसकी रेस्पेक्ट करनी चाहिये। और मैं ऐसा करता हूँ।"
"थैंक्स"- उधर से जबाब आया।
"देखिये, अगर आपने इस लिये फोन किया तो आप इस बात को भूल जाईये। मैंने अपने घरवालों को बता दिया है कि आप को टीचर्स पसन्द नहीं। इसलिये घबराओ मत। और आप अपने पापा को समझा देना। बात खत्म।"
"नहीं, मैं बात को खत्म नहीं करना चाहती। उस दिन मेरा दिमाग खराब हो गया था शायद, जो मैंने ऐसी बातें की। सॉरी। प्लीज मुझे माफ़ कर दो। मेरे पापा और मेरी सहेलियों ने मुझे समझाया कि लड़का अच्छा है मना मत करो।"
"मुझे लगता है कि आपको अपने निर्णय पर रहना चाहिये। शादी आपकी होगी, आपके पापा और सहेलियों की नहीं ?"
"आप अभी भी नाराज हो ? सॉरी कह तो रही हूँ मैं।"
"नहीं नाराजी जैसी कोई बात नहीं। मैं भी आपको समझा रहा हूँ। सॉरी,मेरी क्लास क्लास का टाइम हो गया। अभी मैं फोन रखता हूँ।"
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसी स्थिति में मुझे और क्या जबाब देना चाहिये। इसलिये झूठ क्लास की बात कर,मैंने फोन काट दिया।
....
( जारी..)

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