"उत्तरवन की बोर्ड परीक्षा"


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उत्तरवन में बोर्ड परीक्षायें चल रही थी। हर साल बोर्ड परीक्षायें आते ही चिंकी,मिन्की,सिंकी,जिंकि, हिंकि लोमड़ियाँ और हिन्टू,चिंटू,गिन्टू, सिंटू लोमडों ने अपनी ड्यूटी 'पहुँचूँ सियार' की मदद से (फ्लाइंग) उड़नदस्ते में लगा दी। 

गब्दू चील, लब्दू बाज को जब इस बात का पता चला तो वह बड़े नाराज हुये। उन्होंने फेसबुक,व्हट्स ऐप में इसका जमकर विरोध किया। वह अपनी बात रखने विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पतलू हाथी के पास गये। 
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पतलू हाथी से उन्होंने कहा- "हमसे बड़ा उड़ाका कौन है ? उड़नदस्ते में हमारी ड्यूटी लगनी चाहिये थी। हमारी नहीं तो किसी कौवे,गौरैया या कबूतर की लगा देते ? उनका कम से कम उड़ने का रिकॉर्ड तो है। पर ये जो उड़नदस्ते में आपने लगाये, इनका तो उड़ने से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है ? महाशय ये कैसा लोकतंत्र है ?"
"देखो, मैं जानता हूँ कि आप सबसे अच्छे उड़ाका हो। पर मैं यह भी जनता हूँ कि आपके ऊपर न किसी मंत्री का हाथ है, न किसी अधिकारी का और न ही आपके अपने संगठन के पदाधिकारियों का। फिर आपकी ड्यूटी उड़नदस्ते में कैसे लगती ? लोकतंत्र की पहली शर्त यही है कि आपके ऊपर किसी न किसी का हाथ होना जरूरी है।"- पतलू हाथी ने उनको समझाते हुये कहा। 
"देखिये पतलू सर, आप मजाक कर रहे हो। हम नहीं मानते कि कोई मंत्री इतने छोटे से काम के लिये सिफारिश करेगा। यह तो विभाग का एक बहुत ही छोटा और रूटीन कार्य है।"- गब्दु ने कहा।
"अरे,उड़नदस्ता तो बड़ी बात हो गयी। कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी हेतु भी मंत्री स्तर से सिफारिश आती है।"- पतलू हाथी ने कहा।
"क्या ?" गब्दु चील ने चौंकते हुये कहा।
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उधर चिंकी लोमड़ी बहुत खुश थी। उसकी ड्यूटी फ्लाइंग में लग गयी थी। उसको कक्ष निरीक्षक ड्यूटी बिल्कुल पसंद नहीं थी। पिछली बार जब वह कक्ष निरीक्षक ड्यूटी कर रही थी। तीन घण्टे कमरे में काटना, उसको बड़े अखरे थे। एक दो ड्यूटियों में तो उसने मोबाइल निकाल व्हट्स ऐप में चैट करके काट दिये। पर तीसरी ड्यूटी में केन्द्रव्यवस्थापक टेढ़े सिंह जेब्रा ने उसको कक्ष में फोन यूज़ करने से मना कर दिया। उसके बाद वह परेशान हो गयी। तो उसने बच्चों को दो-चार सवाल जो आते थे, उनको बता-बता कर समय काटा।

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आज चिंकी लोमड़ी पहली बार फ्लाइंग दस्ते के साथ जा रही थी। सुबह 04 बजे ही उसकी नींद खुल गयी थी और 05 बजे वह तैयार होकर बैठ गयी थी। जबकि उनके दस्ते को 09 बजे निकलना था। 05 से 09 बजे का समय ऐसे लगा कि जैसे 04 दिन गुजर गये हों। 09 बजे सभी रवाना हो गये।

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चिंकी जिराफ खाँ के दल में थी। चिंकी मन ही मन सोच रही थी कि इस बार मुझे पहले ही दिन नकल पकड़नी है। अगर मैं ऐसा करने में कामयाब रही, तो जिराफ ख़ाँ खुश हो जायेंगे और अगले साल भी मेरी ड्यूटी फ्लाइंग में पक्की हो जायेगी।

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चिंकी जैसे ही पहले सेंटर में गयी। वह बिजली की फुर्ती से कमरे में पहुंच गयी। उसने इधर-उधर तलाशी ली। नकल कहीं नहीं मिली। वह दूसरे,तीसरे कमरे में गयी वहां भी नकल नहीं मिली। चिंकी परेशान हो गयी। अगले साल क्या होगा ? अभी चौथा कमरा भी था। वह वहां भी गयी,पर वहां भी निराशा ही हाथ लगी। तभी उसको चुन्नी गिलहरी दांतों में पेन रखते दिख गयी। वह तुरंत चुन्नी गिलहरी के पास गयी।
उसने उसकी कॉपी देखी और चिल्ला पड़ी नकल करती हो ? उसके बाद वह कक्ष निरीक्षक बंटी और संटी खरगोश की तरफ लपकी।
"क्या कर रहे हो आप यहां ? देखते नहीं यह नकल कर रही है ?
"मैडम कहाँ है नकल ? - बंटी खरगोश ने पूछा।
"ये देखो ? इसने इस प्रश्न पर टिक लगाया है ? और इसका उत्तर भी लिखा है"
"तो इसमें नकल की क्या बात है, मैडम ?"- संटी खरगोश ने जानना चाहा।
"प्रश्न पढ़ो ध्यान से ?"- चिंकी ने कहा।
"मनुष्य के कितने दाँत होते हैं ? इसमें ऐसी क्या बात है ?"- बंटी ने प्रश्न को जोर से पढ़ा और चिंकी से जानना चाहा।
"अरे, यह देखो इसके मुंह में दांत हैं। जब इसको पता था कि जीव विज्ञान का पेपर है तो यह अपने दांतों को लेकर क्यों आयी ? यह अपने दांत गिन रही थी। मैंने देखा इसको गिनते हुये। यह नकल हुयी या नहीं ?"- चिंकी ने कहा।
"इसको आप नकल कैसे कह सकती हैं ? चलो उच्चाधिकारी को पूछते हैं ?"- सिंटू ने कहा।
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उच्च अधिकारियों से चर्चा हुयी। उच्चाधिकारी दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे कि चुन्नी गिलहरी नकल करने की दोषी है। और साथ में यह आदेश भी निकाल दिया कि भविष्य में जीवविज्ञान के पेपर में विद्यार्थी अपना पूरा शरीर घर छोड़ कर परीक्षा देने आयेंगे।


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