'नोवेल करना वायरस'..भाग -4
अगर लॉक-डाउन आगे बढ़ता है... .......... लॉक-डाउन अगर आगे बढ़ता है। तो सबसे पहले राहत शिविरों में रह रहे लोगों को उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर किये जाने की आवश्यकता है। राहत शिविरों में वह लोग रखे गये हैं, जो लॉक-डाउन के बाद अपने घरों को जाने की कोशिश कर रहे थे। समाचार पत्रों व मीडिया में वायरल खबरों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह लोग इन राहत शिविरों में 22 से 31 मार्च के बीच की अवधि से रह रहे हैं। ..... यह अधिकांश राहत शिविर स्कूलों में स्थापित हैं। जिनमें औसतन 50 लोग तो रह ही रहे होंगे। स्कूलों में शौचालयों की संख्या सीमित होती है। अगर कोई नहाना चाहे तो नहाने के लिये उचित व्यवस्था नहीं रहती। नहाने की उचित सुविधा केवल उन विद्यालयों में होती है जो रेजिडेंशियल होते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन स्कूलों को राहत शिविरों में बदला गया है वह सभी नॉन-रेजिडेंशियल हैं। सीमित शौचालय होने के कारण इन लोगों को होने वाली कठिनाई को समझा जा सकता है। गर्मियां शुरू हो गयी हैं, स्नानागार नहीं भी हैं, तो यह बाहर खुले में नहा सकते हैं। ऐसा भी सवाल शायद किसी के मन में आ रहा हो। पर...