संदेश

मार्च, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चाय पर चर्चा- प्रांतीय अधिवेशन ......भाग-18

चित्र
..18.. "जैसे मैंने कहा कि मैं शिमला नहीं जा सकता था। मैंने उसके सामने, उसके मायके, चंडीगढ़ जाने का प्रस्ताव रखा। पर उसने मना कर दिया। नहीं जी, मुझे तो शिमला ही जाना है। उसकी इस जिद से मुझे गुस्सा आ गया।" "मैंने उसको कई बार समझाया कि निकिता जिद मत करो। मैं शिमला नहीं जा सकता बस। मैं तुम्हारा नौकर नहीं हूँ, जो तुम्हारी हर बात मानता रहूँ। जब मैंने कह दिया कि शिमला नहीं जाना है, तो नहीं जाना है। बाकी तुमको जाना है, तो खुद चली जाओ। गुस्से में और भी न जाने क्या-क्या कह दिया।" "यह सुन निकिता को भी गुस्सा आ गया। तो क्या मैं तुम्हारी नौकरानी हूँ, जो तुमको और तुम्हारे घर वालों को खाना खिलाती हूँ। तुम्हारे कपड़े धुलती हूँ। अपने घर में एक गिलास भी नहीं उठाती थी मैं। तुम्हारे घर में महरी बन चुकी हूँ मैं, महरी, समझे ?" ..... "चार-पांच दिन तक हमारे बीच बातचीत बिल्कुल बंद रही। सुलह का कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। मेरे पास एक ही रास्ता था कि मैं शिमला जाने के लिये तैयार हो जाऊं। पर कई बार सोचने के बाद भी मैं खुद को तैयार नहीं कर पाया। मैं मजबूर था। शिमला जाना और वह ...

चाय पर चर्चा- प्रांतीय अधिवेशन ......भाग-17

चित्र
..17.. "खैर छोड़ो, यह बताइये कि निकिता आपके और भाभी के बीच कैसे आयी ?"- मैंने जानबूझ कर यह सवाल किया। जिससे कहानी को ज्यादा न सुनना पड़े। हम सीधे मुद्दे की बात पर आयें। और अगर मेरे पास महावीर जी की समस्या का कोई हल है, तो उनको जल्दी से सुझाऊँ। "निकिता ही तो तुम्हारी भाभी है।"- महावीर जी ने कहा। "क्या ?"- मैंने आश्चर्य से पूछा। "जैसा कि होता ही है। कई बार ना,कई बार हाँ, करते करते,आखिर मेरी और निकिता की शादी हो ही गयी।"- महावीर जी बोले। "पर फिर अब इतनी जल्दी तलाक की नौबत क्यों आ गयी ?"- मैंने पूछा। "शुरू में सब कुछ अच्छा चल रहा था। हनीमून के लिये उसने गोआ जाने की इच्छा की,तो हम वहाँ गये। खूब घूमे फिरे । जब हम वापस लौटे और मैं अपनी ड्यूटी आया तो उसको बहुत खराब लगा था। वह रोने लगी थी। जैसे नई-नई शादी में होता ही है, दिन में कई बार फोन करना। वही एक जैसी बातें हर बार करना। आपने खाना खा लिया,स्कूल पहुंच गये, क्या कर रहे हो ? स्कूल से घर पहुंच गये? वगैरा वगैरा।" ...... महावीर जी का बोलते-बोलते पहली बार गला भर आया। वह थोड़ी देर के...

"उत्तरवन की बोर्ड परीक्षा"

चित्र
.... उत्तरवन में बोर्ड परीक्षायें चल रही थी। हर साल बोर्ड परीक्षायें आते ही चिंकी,मिन्की,सिंकी,जिंकि, हिंकि लोमड़ियाँ और हिन्टू,चिंटू,गिन्टू, सिंटू लोमडों ने अपनी ड्यूटी 'पहुँचूँ सियार' की मदद से (फ्लाइंग) उड़नदस्ते में लगा दी।   गब्दू चील, लब्दू बाज को जब इस बात का पता चला तो वह बड़े नाराज हुये। उन्होंने फेसबुक,व्हट्स ऐप में इसका जमकर विरोध किया। वह अपनी बात रखने विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पतलू हाथी के पास गये।  .... पतलू हाथी से उन्होंने कहा- "हमसे बड़ा उड़ाका कौन है ? उड़नदस्ते में हमारी ड्यूटी लगनी चाहिये थी। हमारी नहीं तो किसी कौवे,गौरैया या कबूतर की लगा देते ? उनका कम से कम उड़ने का रिकॉर्ड तो है। पर ये जो उड़नदस्ते में आपने लगाये, इनका तो उड़ने से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है ? महाशय ये कैसा लोकतंत्र है ?" "देखो, मैं जानता हूँ कि आप सबसे अच्छे उड़ाका हो। पर मैं यह भी जनता हूँ कि आपके ऊपर न किसी मंत्री का हाथ है, न किसी अधिकारी का और न ही आपके अपने संगठन के पदाधिकारियों का। फिर आपकी ड्यूटी उड़नदस्ते में कैसे लगती ? लोकतंत्र की पहली शर्त यही है कि आपके ...

प्रांतीय अधिवेशन ......भाग-15

चित्र
..15.. "देखो तुम्हारी चंडीगढ़ वाली बुआ का फोन आया था। वहाँ उसने एक लडक़ी देखी है। कह रही थी कि लड़की पढ़ी-लिखी है और इस समय चौदहवीं में पढ़ रही है। अपनी ही रिश्तेदारी में है। तुम छुट्टी आये ही हो, कल हम चंडीगढ़ चल रहे हैं।" अब मैं पापा को क्या समझाता की चौदहवीं कोई कक्षा नहीं होती । ...... हमारी चाय भी आ गयी । "और कुछ लेंगे ?"- महावीर जी ने मुझसे पूछा। मैंने न में सिर हिला दिया। थोड़ी देर हम चुप हो गये। "फिर क्या हुआ ?"- मैंने चुप्पी को तोड़ने के लिये कहा। "होना क्या था, हम दूसरे दिन चंडीगढ़ गये। तीसरे दिन लड़की वालों के घर गये। लड़की के पापा इंजीनियर थे। इंजीनयर साहब की एक लड़की और एक लड़का था। लड़की दिखने में मुझसे बेहतर ही थी। बातचीत के दौरान लड़की ने कह दिया कि मेरी प्राथमिकता में टीचर नहीं है। क्योंकि वह काफी बोरिंग होते हैं। अप्रत्यक्ष रूप से यह भी समझा दिया कि, मुझे तुममें कोई खास इंटरेस्ट नहीं है। और सीधे-सीधे यह भी बता दिया कि देखो मुझे पढ़ाई-लिखाई से भी कोई खास मतलब नहीं है। मैं तो सोच रही हूँ कि कब शादी हो और कब मैं यह पढ़ना छोड़ूं।" ..... ...

प्रांतीय अधिवेशन ......भाग-16

चित्र
..16... "तो क्या यह चंडीगढ़ वाली लड़की आप दोनों के बीच के झगड़े की जड़ है ?" "जी" "लेकिन कैसे ?" मैंने आश्चर्य से पूछा। .... चंडीगढ़ से आये मुझे एक हफ्ता हो गया था। मैं अपने स्कूल भी आ चुका था। एक दिन मैं स्कूल में अपनी घण्टी पढ़ा रहा था। मैं सामान्यतः क्लास में जाने से पहले अपना फोन साइलेंट कर देता हूँ। क्योंकि मुझे क्लास के दौरान फोन उठाना पसंद नहीं। पर उस दिन मैं फोन को साइलेंट मोड़ पर डालना भूल गया। मुझे एक अनजान नंबर से फोन आ गया। रिंगटोन बजते ही मैंने फोन को काट दिया। उस नंबर से फिर फोन आ गया। मैंने फिर काट दिया। पर तीसरी बार जब फोन आया तो मुझे लगा कि कोई अर्जेंट कॉल होगी, नहीं तो कोई इतनी बार क्यों फोन करेगा ? मैं फोन को रिसीव करने क्लास से बाहर आ गया। उधर से आवाज आयी- "हेलो" "हेलो"- मैंने भी जबाब दिया। "क्या आप नाराज हो ?" "जी, ना.. रा.. ज ? लगता है आपने गलत नंबर मिला दिया। सॉरी।" "आप महावीर बोल रहे हैं न ?" "जी, पर मैंने आपको पहचाना नहीं ?" "मैं निकिता बोल रही हूँ" "कौन निकिता...