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जनवरी, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बातों की जलेबी न बनायें

परसों एक प्रिय मित्र का फ़ोन आया,एक लंबे समय बाद। लगभग रात साढ़े बारह बजे। मैंने सोचा मौसम विभाग की सूचना सही हो गयी, जरूर टिहरी में भी कोई आपदा आ गयी । वरना इतनी रात क्यों फ़ोन आएगा । और फ़ोन करने वाले मित्र पोपट लाल की तरह "मिस कॉल" करने के लिए ख्याति प्राप्त हैं। वह आज मिस कॉल नहीं कॉल कर रहे थे ,फिर तो यह कन्फर्म हो गया कि अवश्य उनके क्षेत्र में कोई आपदा आ गयी है। तो उस आपदा की दास्ताँ आप भी सुनिये- "अरे यार सो गए ?" -नहीं, मैं तो क्लास ले रहा हूँ। "क्यों मजाक कर रहा है ?" -  अरे, मजाक तो तुम कर रहे हो।रात के साढे 12 बजे आदमी सोयेगा नहीं तो और क्या करेगा। चल छोड़ बता इतनी रात क्यों फोन किया ? सब कुछ ठीक तो है ? "खाक ठीक है यार तुमने कन्फ्यूज़ कर दिया" - मैंने कन्फ्यूज़ कर दिया ? अरे तुमसे तो कई दिनों से बात भी नहीं हुयी ? तुम कहना क्या चाहते हो ? " अरे ! सरियाल जी की पोस्ट है कि 04 जुलाई तक छुट्टी हैं" -तो इसमें मेरी क्या भूमिका ? तो छुट्टी होगी । " अरे तुमने पोस्ट किया है कि नहीं है, मैं कंफ्यूज हो गया हूँ।" - मैंने कहा कि सरिय...

हड़ताल के बाद

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सम्मानित साथयों, 1- सभी अब हड़ताल के बाद अपने- अपने विद्यालयों में पहुँच गए होंगे। राजकीय शिक्षक संघ को नयी उचाईयों पर पहुचाने के लिए आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद। 2- हड़ताल वापस होनी चाहिए थी या नहीं इस पर सबकी अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं हैं। 3- ठीक इसी प्रकार आंदोलन की सफलता व असफलता को भी लोग अपने- अपने नजरिये से परिभाषित कर रहे हैं। 4- कई लोग निराश हैं कि यह नहीं मिला वह नहीं मिला आदि आदि। 5- मेरा आप सब संघ से जुड़े सदस्यों से अनुरोध है कि निराश होना उचित नहीं है। 6- पहली बार राजकीय शिक्षक संघ द्वारा उत्तराखंड बनने के बाद इतना विराट आंदोलन किया गया। 7-यह पहली लड़ाई है, आखरी नहीं। 8- ये होना चाहिए था वो होना चाहिए था, आपके सुझावों का स्वागत है, संघ से जुड़े रहिये मीटिंग में आईये। अपने सुझावों को लिखित रूप में पत्र के माध्यम से अपने संघठन की किसी भी शाखा को भेजिए। 9- नेतृत्व के निर्णय का सम्मान करिये। हर नेतृत्व की अपनी सीमाएँ होती हैं। इन सब ने अपनी क्षमता के अनुसार कार्य किया। हो सकता है किसी के लिए कम हो। 10- आप में कई की क्षमताएं ज्यादा हो सकती हैं, आप अपने नेतृत्व से संघ को और आगे ले ...

"वेतन कट गया, अरे मेरा वेतन कट गया.."

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1- आज कल एक नयी फिल्म "हड़ताल" का यह रुदाली गीत सोसल मीडिया में सुपर-डुपर हिट हो रहा है। 2- इस गीत को पहले किसने लिखा इसका ठीक-ठीक किसी को पता नहीं है। 3- और इसके सबसे पहले गायक का भी ठीक-ठीक पता नहीं चल पा रहा है। 4- पर भिभिन्न व्हट्स एप व फेसबुक ग्रुपों में यह लगातार लिखा व गाया जा रहा है। 5- यह गीत ट्रेजरी वालों को कुछ ज्यादा ही पसंद आ रहा है, इसलिए ट्रेजरी वाले इसको अपने-अपने हिसाब से वायरल करने में यू-ट्यूब से ज्यादा भूमिका निभा रहे हैं। 6- इस गीत से ट्रेजरी वाले इतने उत्सुक हैं कि वह अपना नया चैनल "ट्रेजरी-ट्यूब" खोलने वाले हैं। 7- ट्रेजरी वालों ने इस चैनल के रजिस्ट्रेशन हेतु सरकार के समक्ष आवेदन कर दिया है। उनकी कोशिश है कि इसी महीने इसको लॉन्च कर दिया जाय। 8- परन्तु इस चैनल को, शिक्षकों का संघठन लॉन्च नहीं होने दे रहा है। क्योंकि इससे उनकी भावनाएं आहत हो रही हैं। 9- पर अगर यह चैनल लॉन्च होता है, तो कई लोगों के दिल को ठंडक मिलनी निश्चित है। जो सरकारी शिक्षकों को "काला बाखरा" की तरह देखते हैं। 10- जिन पर यह गीत फिल्माया गया है, वह लड़ाई में तो ज...

कान उस तरफ से पकड़ो........."

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आज एक सज्जन से बैंक की कतार में मुलाकात हुयी , जो बातचीत से किसी खास पार्टी के युवा तुर्क लग रहे थे। बातचीत से जल्दी से समझ आ गया कि वह "कान को इस तरफ से पकड़ रहे थे.........."  कहीं आप भी ऐसा ही तो नहीं कर रहे हो ? आओ इसका पता लगायें। मुलाकात का वार्तालाप सुनिये ---- "भाई साहब, देखो मोदी ने सबको पागल बना दिया है। कितने दिन और लोग लाइन में लगे रहेंगे ? -- वास्तव में अभी यह लाइनें कुछ ज्यादा दिन चलने वाली हैं। " वही तो, बिना तैयारी के नोट बंद कर दिये । किसी के घर में शादी है। किसी को लोन चुकाना है, किसी की तबीयत खराब है। आखिर लोग पैसा कहाँ से लायें ?" -- आप बिलकुल सही कह रहे हैं। लोगों को परेशानी तो वास्तव में हो रही है। अब सरकार का निर्णय है, मानना तो पड़ेगा ही। " देखना यह पूरे पांच साल रहे , तो यह गरीबों को पूरी तरह ख़त्म कर देंगे " -- यह तर्क मुझे कुछ अजीब सा लगा, पर मैंने सहमति वाली इस्माइल पास कर दी। मेरी सहमति से उन्हें अपने तर्क पर गर्व जैसा कुछ महसूस हुआ । " भाई जी, मैं फलाणी पार्टी का युथ प्रकोष्ठ का सचिव हूँ। कभी कोई काम हो बताना ।...

उत्तराखंड में ट्रांसफर पर

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"जाट मर गया"* देवियों और सज्जनों ! 1- जिनके भी कथित रूप से ट्रांसफर आदेश हुये हैं,उनको बहुत- बहुत सुभकामनाएँ। 2- अगर यह सच साबित हुये तो नए साल 2017 का इससे बेहतर गिफ्ट नहीं हो सकता है। 3- हरियाणा की एक कहावत है " जाट मरे तब जाणों, जब उसकी तेरहवीं हो जाय।" तो अभी केवल जाट के मरने की सूचना मात्र है। 4- शिक्षा विभाग के पिछले अनुभव आपके साथ हैं। इसलिए यह मत सोचना कि मैं आपको डरा रहा हूँ। 5- इसलिये ट्रांसफर की ख़ुशी में पार्टी-शॉर्टी से थोड़ा बच के रहें। 6- माना पार्टी करने को मन हिलोरें मार ही रहा हो, तो यह कहना की यह न्यू ईयर की पार्टी है। भूल से ट्रांसफर की मत कह देना। 7- ट्रांसफर की ख़ुशी होना लाजमी है, पर उस ख़ुशी को चेहरे पर आने से जितना रोक सकें तो रोकें। 8- अब मैं ख़ुशी रोकने को क्यों कह रहा हूँ ? 9- पहला कारण- क्योंकि इस लिस्ट में कुछ साथियों के ट्रांसफर अथिति शिक्षकों की जगह हुए हैं। आप समझ रहे हैं न,मैं क्या कहना चाह रहा हूँ ? 10- दूसरा कारण- कुछ लोग आपकी और हमारी तरह "ऑनलाइन वीर" नहीं होते ( जो 24 घंटे ऑनलाइन रहते हों ), जो "ऑनलाइन ट्रांसफर...

"मॉडल स्कूल और कैट्वॉक"

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1- वैसे तो मैं सुबह जल्दी उठने का आदी नहीं हूँ, पर पिछले महीने जब से यह खबर आयी कि मॉडल स्कूल के लिए जिन्होंने एग्जाम दिया है, उनके लिए मैरिट 50 % कर दी है। 2- यह खबर सुनकर मेरा मन हिलोरें मारने लगा,कि अब तो जाना पक्का समझो। और मैंने जल्दी उठना शुरू कर दिया। 3- सुबह के अंधरे में दुर्गम के सन्नाटे में घूमने के लिए सड़क में आया,तो जंगली जानवरों के डर से क़दमों ने आगे बढ़ने से साफ़ इंकार कर दिया, जैसे विभाग ने अनिवार्य ट्रांसफर करने के लिए साफ मना कर दिया। विभाग को पता नहीं किन जंगली जानवरों का डर लगा? 4- पर मुझे, सच बता रहा हूँ बाघ का डर लगा,क्योंकि गांव वाले कई बार ताकीद कर चुके थे कि गुरूजी आपके कमरे की दायीं तरफ कई बार बाघ देखा गया है, इसलिए होशियार रहना। 5-अब होशियार तो कभी मैं अपनी कक्षा में नहीं रहा, जैसे तैसे अपनी पढाई पूरी की,तो यहाँ कैसे रहता ? 6- दूसरा मॉडल स्कूल के मेरे रिजल्ट ने भी साबित कर दिया कि (मेरे 60% अंक भी नहीं आ पाये) बेटे क्यों फालतू में होशियार बनने की कोशिश करता है ? 7- अब होशियार मैं हो नहीं सकता, और ऊपर से मास्टर, जो कर्मचारियों के सबसे कमजोर व डरपोक तबके से आत...

"सर्जिकल स्ट्राइक"

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साथियों, 1- स्कूलों को ISI के ठिकाने समझ कर । 2- मास्टरों को आतंकवादी समझकर, जो हमारे अधिकारी घात लगाकर छापा मारते हैं। 3- अब समझ आया कि वह उनकी तरफ से की गयी "सर्जीकल स्ट्राइक" होती है। 4- उनकी प्लानिंग इतनी पक्की होती है कि सेना की टाइमिंग मिस हो जायेगी पर उनकी टाइमिंग कभी मिस नहीं होती। 5- वह ठीक अगर 09 :45 बजे स्कूल है, तो 09:30 पर पहुँच जाते हैं , जो आतंकवादी लेट हो गया उसको धर दबोचते हैं। (यह अलग बात है कि अपने ऑफिस इतनी जल्दी पहुँचते, वह यदा-कदा ही देखे जाते हैं)। 6- या फिर 3:50 छुट्टी का टाइम है । वह ठीक 3:45 पर स्कूल में पहुँच जायेंगे और जो आतंकवादी शिविर छोड़ देते हैं, उनका नाम पाकिस्तानी सेना में शामिल कर दिया जाता है। 7- उसके बाद बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है, जिसमें पकडे गए आतंकवादियों के नाम उजागर किये जाते हैं। 8- और पूरे प्रान्त को बताया जाता है कि हमने कितने बजे छापा मारा, कैसे- कैसे हमने इस "सर्जीकल स्ट्राइक" को अंजाम दिया। 9- दूसरे दिन पूरे मीडिया जगत में और अभिभावकों में सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा रहती है। 10- उसके कुछ दिनों तक जो डरपोक ...
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*"मेरी पीड़ा"*  1- फोटो को ध्यान से देखें। पहले पूरी खबर पढ़ लें। फिर अंडरलाइन पर ज्यादा गौर करें। 2- अब खबर के उद्देश्य पर गौर करें ? 3- पातरकार मित्र क्या सन्देश दे रहें हैं ? 4- प्रथम दृष्टया यह लगता है कि यह छुट्टियों में अपने कार्य के प्रति समर्पित अथिति शिक्षकों को समाज के सामने लाना चाहते हैं। 5- मीडिया का काम ही यह है, उसे ऐसा करना चाहिए। 6- पर खबर को ध्यान से पढ़ने पर पता चलता है कि यह "स्थायी शिक्षक" विरोधी मानसिकता के कारण लिखी खबर है। 7- इस बात को लिखने क्या मतलब हुआ कि अथिति शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं ,"जबकि स्थाई शिक्षक छुट्टी जा रखे हैं।" इससे ऐसा प्रतीत होता है कि स्थाई शिक्षकों ने छुट्टी जाकर गुनाह कर दिया। और उन्हें छात्रों के हित की कोई चिंता नहीं है। 8- आखिर मीडिया वाले समाज को क्या सन्देश देना चाहते हैं ? कि स्थाई शिक्षक बच्चों के प्रति समर्पित नहीं हैं ? तभी तो कुकुरमुत्तों की तरह प्राइवेट स्कूल खुल रहे हैं। 9- और उन स्कूलों में हजारों अप्रशिक्षित शिक्षक कार्य कर रहे हैं। या यूँ कहें कि अपना शोषण करवा रहे हैं।  10- क्य...